Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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३३८ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
उपजे तेने प्रथमोपशमसम्यक्त्व कहीए छीए.
त्यां एटलुं विशेष छे केअनादिमिथ्याद्रष्टिने तो एक मिथ्यात्वप्रकृतिनो ज उपशम
होय छे, कारण केतेने मिश्रमोहनीय तथा सम्यक्त्वमोहनीयनी सत्ता नथी, पण ज्यारे जीव
उपशमसम्यक्त्वने प्राप्त थाय छे, त्यारे ते सम्यक्त्वना काळमां मिथ्यात्वना परमाणुओने मिश्र-
मोहनीयरूपे वा सम्यक्त्वमोहनीयरूपे परिणमावे छे, त्यारे तेने त्रण प्रकृतिओनी सत्ता थाय
छे, माटे अनादि मिथ्याद्रष्टिने एक मिथ्यात्वप्रकृतिनी सत्ता छे, अने तेनो ज उपशम थाय
छे. वळी सादिमिथ्याद्रष्टिओमां कोईने त्रण प्रकृतिओनी सत्ता छे तथा कोईने एकनी ज सत्ता
छे. जेने सम्यक्त्वना काळमां त्रणनी सत्ता थई हती ते सत्ता जेनामां होय तेने तो त्रणनी
सत्ता छे, तथा जेने मिश्रमोहनीय अने सम्यक्त्वमोहनीयनी उद्वेलना थई गई होय अर्थात्
तेना परमाणु मिथ्यात्वरूपे परिणमी गयां होय तेने एक मिथ्यात्वनी ज सत्ता छे; माटे
सादिमिथ्याद्रष्टिने त्रण प्रकृतिओनो वा एक प्रकृतिनो उपशम थाय छे.
प्रश्नःउपशम एटले शुं?
उत्तरःअनिवृत्तिकरणमां करेलां अंतरकरणविधानथी सम्यक्त्वना काळमां जे उदय
आववा योग्य निषेक हता तेनो तो अहीं अभाव कर्यो, अर्थात् तेना परमाणुओने अन्य काळमां
उदय आववा योग्य निषेकरूप कर्या; तथा अनिवृत्तिकरणमां ज करेला उपशमविधानथी जे ते
काळमां उदय आववा योग्य निषेक हता ते उदीरणारूप थईने आ काळमां उदयमां न आवी
शके एवा कर्या.
ए प्रमाणे ज्यां सत्ता तो होय पण तेनो उदय न होय तेनुं नाम उपशम छे.
एम आ मिथ्यात्वथी थयेलुं प्रथमोपशमसम्यक्त्व छे ते चतुर्थादिथी मांडी सातमा
गुणस्थान सुधी होय छे.
तथा प्रथमश्रेणी सन्मुख थतां सातमा गुणस्थानमां क्षयोपशमसम्यक्त्वथी जे
उपशमसम्यक्त्व थाय तेनुं नाम द्वितीयोपशमसम्यक्त्व छे. अहीं करणवडे त्रण ज प्रकृतिओनो
उपशम थाय छे. कारण के आने त्रण प्रकृतिओनी ज सत्ता होय छे. अहीं पण अंतरकरण-
विधानथी वा उपशमविधानथी तेना उदयनो अभाव करे छे ए ज उपशम छे. ते आ
द्वितीयोपशमसम्यक्त्व सातमा आदिथी मांडी अगीयारमा गुणस्थान सुधी होय छे तथा त्यांथी
पडतां कोईने छठ्ठे, पांचमे अने चोथे गुणस्थाने पण रहे छे एम जाणवुं.
एम उपशमसम्यक्त्व बे प्रकारथी छे. ए सम्यक्त्व वर्तमानकाळमां क्षायिकवत् निर्मळ
छे; तेने प्रतिपक्षीकर्मनी सत्ता होय छे तेथी आ सम्यक्त्व अंतर्मुहूर्तकाळमात्र रहे छे. पछी
दर्शनमोहनो उदय आवे छे एम जाणवुं.