नवमो अधिकार ][ ३३९
ए प्रमाणे उपशमसम्यक्त्वनुं स्वरूप कह्युं.
तथा ज्यां दर्शनमोहनी त्रण प्रकृतिओमां सम्यक्त्वमोहनीयनो उदय होय, अन्य बेनो
उदय न होय, त्यां क्षयोपशमसम्यक्त्व होय छे. उपशमसम्यक्त्वनो काळ पूर्ण थतां आ
सम्यक्त्व होय छे अथवा सादिमिथ्याद्रष्टिने मिथ्यात्वगुणस्थानथी वा मिश्र गुणस्थानथी पण
आनी प्राप्ति थाय छे.
प्रश्नः — क्षयोपशम एटले शुं?
उत्तरः — दर्शनमोहनीयनी त्रण प्रकृतिओमां जे मिथ्यात्वनो अनुभाग छे तेना
अनंतमा भागे मिश्रमोहनीयनो छे, तेना अनंतमा भागे सम्यक्त्वमोहनीयनो अनुभाग छे,
तेमां सम्यक्त्वमोहनीयप्रकृति देशघाति छे, तेनो उदय होवा छतां पण सम्यक्त्वनो घात थतो
नथी, किंचित् मलिनता करे पण मूळथी घात न करी शके, तेनुं ज नाम देशघाति छे.
हवे ज्यां मिथ्यात्व वा सम्यक्मिथ्यात्वना वर्तमानकाळमां उदय आववा योग्य निषेकोनो
उदय थया विना ज निर्जरा थाय ए तो क्षय जाणवो तथा तेना भाविकाळमां उदय आववा
योग्य निषेकोनी सत्ता होय ते ज उपशम छे अने सम्यक्त्वमोहनीयनो उदय वर्ते छे, एवी
दशा ज्यां होय ते क्षयोपशम छे; तेथी समळतत्त्वार्थश्रद्धान होय ते क्षयोपशमसम्यक्त्व छे.
अहीं जे मळ लागे छे तेनुं तारतम्य स्वरूप तो केवळज्ञानी जाणे छे. उदाहरण
दर्शाववा अर्थे चल, मलिन अने अगाढपणुं कह्युं छे. त्यां व्यवहारमात्र देवादिकनी प्रतीति तो
होय परंतु अरहंतदेवादिमां ‘आ मारा छे, आ अन्यना छे’ — इत्यादि भाव ते चलपणुं छे,
शंकादि मळ लागे ते मलिनपणुं छे तथा आ ‘शांतिनाथ शांतिना कर्ता छे’ इत्यादि भाव ते
अगाढपणुं छे. एवा उदाहरण व्यवहारमात्रमां दर्शाव्यां छे, परंतु नियमरूप नथी. क्षयोपशम-
सम्यक्त्वमां जे नियमरूप कोई मळ लागे छे ते तो केवळज्ञानी जाणे छे, आटलुं समजवुं
के – तेने तत्त्वार्थश्रद्धानमां कोई प्रकारथी समळपणुं होय छे तेथी ए सम्यक्त्व निर्मळ नथी. आ
क्षयोपशमसम्यक्त्वनो एक ज प्रकार छे, एमां कोई भेद नथी.
विशेष एटलुं छे के — क्षायिक सम्यक्त्वनी सन्मुख थतां अंतर्मुहूर्तकाळमात्र ज्यां
मिथ्यात्वप्रकृतिनो क्षय करे छे त्यां बे ज प्रकृतिओनी सत्ता रहे छे, पछी मिश्रमोहनीयनो
पण क्षय करे छे त्यां एक सम्यक्त्वमोहनीयनी ज सत्ता रहे छे, त्यारपछी सम्यक्त्व-
मोहनीयनी कांडकघातादिक्रिया करतो नथी त्यां ए कृतकृत्य वेदकसम्यग्द्रष्टि नाम पामे छे,
— एम जाणवुं.
ए क्षयोपशमसम्यक्त्वनुं ज नाम वेदकसम्यक्त्व छे. ज्यां मिथ्यात्वमिश्रमोहनीयनी
मुख्यताथी कहीए त्यां क्षयोपशम नाम पामे छे तथा ज्यां सम्यक्त्वमोहनीयनी मुख्यताथी