Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration). Samyagdarshanana Aatha Anga.

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नवमो अधिकार ][ ३४३
सम्यक्त्व-मार्गणामां मिथ्यात्व कह्युं छे. ए ज प्रमाणे सासादन अने मिश्र पण सम्यक्त्वना
भेद नथी, सम्यक्त्वना तो त्रण ज भेद छे, एम समजवुं.
अहीं कर्मना उपशमादिकथी उपशमादिसम्यक्त्व कह्यां पण कर्मनां उपशमादिक कांई
आनां कर्यां थतां नथी, माटे आ जीव तो तत्त्वश्रद्धान करवानो उद्यम करे अने तेना निमित्तथी
कर्मनां उपशमादिक तो स्वयमेव थाय छे त्यारे तेने तत्त्वश्रद्धानी प्राप्ति थाय छे, एम समजवुं.
ए प्रकारथी सम्यक्त्वना भेद जाणवा. ए प्रमाणे सम्यग्दर्शननुं स्वरूप कह्युं.
हवे सम्यग्दर्शननां आठ अंग कहीए छीए.
सम्यग्दर्शननां आL अंग
निःशंकितत्त्व, निःकांक्षितत्त्व, निःर्विचिकित्सत्व, अमूढद्रष्टित्व, उपबृंहण, स्थितिकरण,
प्रभावना अने वात्सल्यए सम्यक्त्वनां आठ अंग छे. १भयनो अभाव अथवा तत्त्वोमां
संशयनो अभाव ते निःशंकितत्त्व छे. २परद्रव्य आदिमां रागरूप वांछानो अभाव
ते निःकांक्षितत्त्व छे. ३परद्रव्य आदिमां द्वेषरूप ग्लानिनो अभाव ते निर्विचिकित्सत्व छे. ४
तत्त्वोमां अने देवादिकमां अन्यथा प्रतीतिरूप मोहनो अभाव ते अमूढद्रष्टित्व छे.
आत्मधर्म वा जिनधर्मने वधारवो तेनुं नाम उपबृंहण छे, तथा ए ज अंगनुं नाम
उपगूहन पण कहीए छीए, त्यां धर्मात्मा जीवोना दोषने ढांकवा एवो उपगूहननो अर्थ
समजवो. ६
पोताना स्वभावमां वा जिनधर्ममां पोताने वा परने स्थापन करवो ते स्थितिकरण
अंग छे. ७पोताना स्वरूपनुं वा जिनधर्मनुं माहात्म्य प्रगट करवुं, ते प्रभावना छे.
पोताना स्वरूपमां, जिनधर्ममां वा धर्मात्मा जीवोमां अति प्रीतिभाव ते वात्सल्य छे. ए
प्रमाणे आठ अंग जाणवां.
जेम मनुष्यशरीरनां हाथपग आदि अंग छे तेम आ पण सम्यक्त्वनां अंग छे.
प्रश्नःकेटलाक सम्यग्द्रष्टि जीवोने पण भय, इच्छा अने ग्लानि आदि होय
छे तथा कोई मिथ्याद्रष्टिने ते नथी होतां, तेथी ए निःशंकितादिने सम्यक्त्वनां अंग केम
कहो छो?
उत्तरःजेम मनुष्यशरीरनां हाथपग आदि अंग कहीए छीए त्यां कोई मनुष्य
एवा पण होय छे के जेमने हाथपग आदि कोई अंग होतां नथी छतां तेने मनुष्यशरीर
तो कहीए छीए, परंतु ए अंगो विना ते शोभायमान वा सकळ कार्यकारी थतो नथी; तेम
सम्यक्त्वना निःशंकितादि अंग कहीए छीए त्यां कोई सम्यग्द्रष्टि एवा पण होय छे के जेमने
निःशंकितत्वादिमांनां कोई अंग न होय छतां तेमने सम्यक्त्व तो कहेवामां आवे छे. परंतु
ए अंगो विना ते सम्यग्दर्शन निर्मळ सकळ कार्यकारी थतुं नथी. वळी जेम वांदराने पण