Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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३५२ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
जैनागममां जेवुं आत्मानुं स्वरूप कह्युं छे तेने तेवुं जाणी तेमां परिणामोने मग्न करे छे तेथी
तेने आगम परोक्षप्रमाण कहीए, अथवा ‘‘हुं आत्मा ज छुं केमके मारामां ज्ञान छे, ज्यां
ज्यां ज्ञान त्यां त्यां आत्मा छे, जेम केः
सिद्धादिक. वळी ज्यां आत्मा नहि त्यां ज्ञान पण
नहि जेम केःमृतक क्लेवरादिक.’’ ए प्रमाणे अनुमानवडे वस्तुनो निश्चय करीने तेमां
परिणामोने मग्न करे छे, तेथी तेने अनुमान परोक्षप्रमाण कहीए, अथवा आगम
अनुमानादिवडे जे वस्तु जाणवामां आवी तेने याद राखीने तेमां परिणामोने मग्न करे छे
तेथी तेने स्मृति कहीए. इत्यादि प्रकारथी स्वानुभवमां परोक्षप्रमाण वडे ज आत्मानुं जाणवुं
होय छे, त्यां प्रथम जाणवुं थाय छे, पछी जे स्वरूप जाण्युं तेमां ज परिणाम मग्न थाय
छे, परिणाम मग्न थतां कंई विशेष जाणपणुं होतुं नथी.
प्रश्नःजो सविकल्पनिर्विकल्पमां जाणवानी विशेषता नथी तो
अधिक आनंद केम थाय?
समाधानःसविकल्पदशामां ज्ञान अनेक ज्ञेयोने जाणवारूपे प्रवर्ततुं हतुं, निर्विकल्प-
दशामां मात्र आत्माने ज जाणवामां प्रवर्ते छे, एक तो ए विशेषता छे; बीजी ए विशेषता
छे के जे परिणाम विविध विकल्पमां परिणमता हता ते मात्र स्वरूपमां ज तादात्म्यरूप थई
प्रवर्त्या, बीजी ए विशेषता थई.
एवी विशेषताओ थतां कोई वचनातीत एवो अपूर्व आनंद थाय छे के विषयसेवनमां
तेनी जातिनो अंश पण नथी, तेथी ए आनंदने अतीन्द्रिय कहे छे.
प्रश्नःअनुभवमां पण आत्मा परोक्ष ज छे तो ग्रंथोमां अनुभवने
प्रत्यक्ष केम कह्यो छे? उपरनी गाथामां ज कह्युं छे केः‘‘पच्चक्खो अणुहवो
जम्हा’’ ते केम छे?
समाधानःअनुभवमां आत्मा तो परोक्ष ज छे, कांई आत्माना प्रदेशनो आकार
तो भासतो नथी, परंतु स्वरूपमां परिणाम मग्न थतां जे स्वानुभव थयो ते स्वानुभव प्रत्यक्ष
छे. स्वानुभवनो स्वाद कांई आगम
अनुमानादिक परोक्ष प्रमाणादिवडे जणातो नथी. पोते ज
अनुभवना रसास्वादने वेदे छे. जेम कोई अंध मनुष्य साकरनो आस्वाद करे छे, त्यां साकरनां
आकारादि तो परोक्ष छे, पण जीभवडे जे स्वाद लीधो ते स्वाद प्रत्यक्ष छे, एम स्वानुभवमां
आत्मा परोक्ष छे, जे परिणामथी स्वाद आव्यो ते स्वाद प्रत्यक्ष छे
एम जाणवुं.
अथवा जे प्रत्यक्ष जेवुं होय तेने पण प्रत्यक्ष कहीए छीए. जेम लोकोमां कहीए छीए
के‘अमे स्वप्नामां वा ध्यानमां फलाणा पुरुषने प्रत्यक्ष दीठो;’ त्यां तेने प्रत्यक्ष दीठो नथी,
परंतु प्रत्यक्ष माफक प्रत्यक्षवत् (ते पुरुषने) यथार्थ देख्यो तेथी तेने प्रत्यक्ष कहीए; तेम