परमार्थवचनिका ][ ३५९
ते बन्नेनुं स्वरूप सर्वथा प्रकारे तो केवळज्ञानगोचर छे; अंशमात्र मति-श्रुतज्ञानग्राह्य
छे. तेथी सर्वथा प्रकारे आगमी, अध्यात्मी तो केवळज्ञानी, अंशमात्र मति – श्रुतज्ञानी तथा
देशमात्रज्ञाता अवधिज्ञानी, मनःपर्ययज्ञानी छे; ए त्रणे (सर्वथा, अंशमात्र, देशमात्र)
यथावस्थित ज्ञानप्रमाण न्यूनाधिकरूप जाणवा.
मिथ्याद्रष्टि जीव न आगमी छे, न अध्यात्मी छे, कारण के ते कथनमात्र तो ग्रंथपाठना
बळवडे आगम – अध्यात्मनुं स्वरूप उपदेशमात्र कहे छे परंतु ते आगम – अध्यात्मना स्वरूपने
सम्यक्प्रकारे जाणतो नथी. तेथी मूढजीव न आगमी के न अध्यात्मी छे. (कारण के तेने ते
भावनुं वेदन ज नथी) यथा — निर्वेदकत्वात्।
हवे मूढ अने ज्ञानी जीवनुं विशेषपणुं अन्य पण सांभळो
ज्ञाता तो मोक्षमार्ग साधी जाणे छे, मूढ मोक्षमार्ग साधी जाणे नहि.
शामाटे? तो सांभळोः — मूढ जीव आगमपद्धतिने व्यवहार कहे छे अने अध्यात्म-
पद्धतिने निश्चय कहे छे, तेथी ते आगमअंगने एकान्तपणे साधी मोक्षमार्ग दर्शावे छे;
अध्यात्मअंगने व्यवहारथी पण जाणे नहि ए मूढद्रष्टि जीवनो स्वभाव छे; तेने ए ज प्रमाणे
सूजे छे.
शाथी? कारण के आगमअंग बाह्यक्रियारूप प्रत्यक्षप्रमाण छे, तेनुं स्वरूप साधवुं तेने
सुगम छे, ते बाह्यक्रिया करतो थतो मूढ जीव पोताने मोक्षनो अधिकारी माने छे, पण
अंतर्गर्भित अध्यात्मरूप क्रिया जे अंतर्दष्टिग्राह्य छे ते क्रियाने मूढ जीव जाणे नहि, कारण –
अंतर्द्रष्टिना अभावथी अंतरक्रिया द्रष्टिगोचर आवे नहि; तेथी मिथ्याद्रष्टि जीव (गमे तेटली
बाह्यक्रिया करतो छतो पण) मोक्षमार्ग साधवामां असमर्थ छे. हवेः —
सम्यग्द्रष्टिनो विचार सांभळो
सम्यग्द्रष्टि कोण कहेवाय ते सांभळोः — संशय, विमोह अने विभ्रम ए त्रण भाव
जेनामां नथी ते जीव सम्यग्द्रष्टि.
संशय, विमोह अने विभ्रम शुं? तेनुं स्वरूप द्रष्टांतवडे दर्शावे छे ते श्रवण करोः —
जेमके चार पुरुष कोई एक स्थानमां ऊभा हता. त्यां कोई अन्य पुरुषे ते चारे पासे एक
छीपनो खंड लावी बताव्यो, अने प्रत्येकने प्रश्न कर्यो के आ शुं छे? छीप छे के रूपुं? प्रथम
संशयवाळो पुरुष बोल्यो के कांई समज पडती नथी के आ ते छीप छे के रूपुं! मारी द्रष्टिमां
तेनो निर्धार थतो नथी. पछी बीजो विमोहवाळो पुरुष बोल्यो के मने ए कांई समजण नथी
के तमे छीप कोने कहो छो तथा रूपुं कोने कहो छो? मारी द्रष्टिमां कांई आवतुं नथी तेथी
हुं नथी जाणतो के तमे शुं कहेवा मागो छो? अथवा ते चुप रहे, घेलछाथी बोले नहि.