Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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३६४ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
वळी कोई समये ते जीवनो ज्ञानगुण अजाणरूप छे ते घेलछारूप होय छे, तेथी केवळ
बंध छे. ए प्रमाणे मिथ्यात्वअवस्थामां कोई समये चारित्रगुण विशुद्धरूप होय छे; तेथी
चारित्रावरणकर्म मंद छे, ते मंदताथी निर्जरा छे. तथा कोई समये चारित्रगुण संक्लेशरूप होय
छे तेथी केवळ तीव्रबंध थाय छे. ए प्रमाणे मिथ्यात्व-अवस्थामां जे समये जाणरूप ज्ञान अने
विशुद्धतारूप चारित्र छे ते समये निर्जरा छे. जे समये अजाणरूप ज्ञान संक्लेशरूप चारित्र छे
ते समये बंध छे. तेमां विशेष एटलुं के अल्प निर्जरा अने घणो बंध थाय छे; तेथी ए अल्पनी
अपेक्षाए मिथ्यात्व-अवस्था विषे केवळ बंध कह्यो. जेमके
कोई पुरुषने नफो थोडो अने नुकशानी
घणी, तो ते पुरुष टोटावाळो ज कहेवाय, परंतु बंधनिर्जरा विना जीव कोई अवस्थामां नथी.
द्रष्टांतःजो विशुद्धता वडे निर्जरा न थती होय तो एकेन्द्रिय जीव निगोद अवस्थाथी
व्यवहारराशिमां कोना बळथी आवे छे? त्यां तो ज्ञानगुण अजाणरूप, घेलछारूप, अबुद्धरूप
छे, तेथी ज्ञानगुणनुं तो बळ नथी. विशुद्धरूप चारित्रना बळथी जीव व्यवहारराशिमां चढे छे.
जीवद्रव्यमां कषायनी मंदता थाय छे तेथी निर्जरा थाय छे, ए मंदताना प्रमाणमां (चारित्रगुणनी)
शुद्धता जाणवी.
हवे बीजो पण विस्तार सांभळोः
ज्ञाननुं जाणपणुं अने चारित्रनी विशुद्धता बन्ने मोक्षमार्गानुसारी छे; तेथी बंनेमां
विशुद्धता मानवी, परंतु विशेष एटलुं के गर्भित शुद्धता ए प्रगट शुद्धता नथी. ए बंने गुणनी
गर्भित शुद्धता ज्यां सुधी ग्रंथिभेद थाय नहि त्यां सुधी मोक्षमार्ग साधे नहि, परंतु (जीवने)
ऊर्ध्वता करे, अवश्य करे ज, (पण मोक्षमार्गना कारणरूप ते न थाय.) ए बंने गुणोनी गर्भित
शुद्धता ज्यारे ग्रंथिभेद थाय त्यारे ए बन्नेनी शिखा फूटे अने त्यारे ए बंने गुण धाराप्रवाहरूपे
मोक्षमार्ग तरफ चाले ज्ञानगुणनी शुद्धतावडे ज्ञानगुण निर्मळ थाय तथा चारित्रगुणनी शुद्धतावडे
चारित्रगुण निर्मळ थाय, अने ते केवळज्ञाननो अंकुर तथा ते यथाख्यातचारित्रनो अंकुर छे.
प्रश्नःतमे कह्युं के ज्ञाननुं जाणपणुं अने चारित्रनी विशुद्धताए बंनेथी
निर्जरा थाय छे. त्यां ज्ञानना जाणपणाथी तो निर्जरा थाय ए तो हुं मानुं छुं, परंतु
चारित्रनी विशुद्धताथी निर्जरा केवी रीते थाय? ए हुं समजतो नथी. तेनुं समाधानः
समाधानःभाई! सांभळ, विशुद्धता स्थिरतारूप परिणामथी कहीए छीए. ए
स्थिरता यथाख्यातचारित्रनो अंश छे ए अपेक्षाए विशुद्धतामां शुद्धता आवी.
प्रश्नःतमे विशुद्धताथी निर्जरा कही, पण हुं कहुं छुं के विशुद्धताथी निर्जरा
नथी पण शुभबंध छे.
समाधानःभाई! सांभळ, ए तो तारुं कहेवुं खरुं छे; विशुद्धताथी शुभबंध अने