Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (English transliteration). Gatha: 175 (Adhikar 2).

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adhikAr-2 dohA-175 ]paramAtmaprakAsha [ 501
३०६) जो परमप्पा णाणमउ सो हउँ देउ अणंतु
जो हउँ सो परमप्पु परु एहउ भावि णिभंतु ।।१७५।।
यः परमात्मा ज्ञानमयः स अहं देवः अनन्तः
यः अहं स परमात्मा परः इत्थं भावय निर्भ्रान्तः ।।१७५।।
जो परमप्पा इत्यादि जो परमप्पा यः कश्चित् प्रसिद्धः परमात्मा
सर्वोत्कृष्टानन्तज्ञानादिरूपा मा लक्ष्मीर्यस्य स भवति परमश्चासावात्मा च परमात्मा णाणमउ
ज्ञानेन निवृत्तः ज्ञानमयः सो हउं यद्यपि व्यवहारेण कर्मावृतस्तिष्ठामि तथापि निश्चयेन स
एवाहं पूर्वोक्त : परमात्मा
कथंभूतः देउ परमाराध्यः पुनरपि कथंभूतः अणंत
अनन्तसुखादिगुणास्पदत्वादनन्तः जो उं सो परमप्पु योऽहं स्वदेहस्थो निश्चयेन परमात्मा स
bhAvArtha‘parA’ arthAt sarvotkRuShTa-anantagnAnAdirUp ‘mA’ arthAt lakShmI jene chhe te
‘param’ chhe, ane param evo AtmA te ‘paramAtmA chhe’ ke je ‘gnAnamay’ arthAt gnAnathI
rachAyel chhe; jo ke hun vyavahArathI karma vaDe avarAyelo chhun topaN, nishchayathI pUrvokta prasiddha
(gnAnamay) paramAtmA chhun ke je ‘dev’ arthAt param ArAdhya chhe ane anant sukhAdi guNonun
sthAn hovAthI ‘anant’ chhe
te ja hun chhun. svadehamAn rahelo hun nishchayathI paramAtmA chhun, tenA jevA
ja muktiprApta paramAtmA chhe je paramaguNayukta hovAthI ‘utkRuShTa’ chhe-AvA paramAtmAne, he
prabhAkarabhaTTa! tun sanshayarahit thayo thako bhAv.
गाथा१७५
अन्वयार्थ :[यः परमात्मा ] जो परमात्मा [ज्ञानमयः ] ज्ञानस्वरूप है, [स अहं ]
वह मैं ही हूँ, जो कि [अनंत देवः ] अविनाशी देवस्वरूप हूँ, [य अहं ] जो मैं हूँ [स परः
परमात्मा ] वही उत्कृष्ट परमात्मा है
[इत्थं ] इसप्रकार [निर्भ्रांतः ] निस्संदेह [भावय ] तू
भावना कर
भावार्थ :जो कोई एक परमात्मा परम प्रसिद्ध सर्वोत्कृष्ट अनंतज्ञानादिरूप लक्ष्मीका
निवास है, ज्ञानमयी है, वैसा ही मैं हूँ यद्यपि व्यवहारनयकर मैं कर्मोंसे बँधा हुआ हूँ, तो भी
निश्चयनयकर मेरे बंध मोक्ष नहीं है, जैसा भगवान्का स्वरूप है, वैसा ही मेरा स्वरूप है
जो आत्मदेव महामुनियोंकर परम आराधने योग्य है, और अनंत सुख आदि गुणोंका निवास
है
इससे यह निश्चय हुआ कि जैसा परमात्मा वैसा यह आत्मा और जैसा यह आत्मा है,
वैसा ही परमात्मा है जो परमात्मा है वह मैं हूँ, और जो मैं हूँ, वही परमात्मा है अहं यह