Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Malayalam transliteration). Gatha-197 (Adhikar 2).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ശ്രീ ദിഗംബര ജൈന സ്വാധ്യായമംദിര ട്രസ്ട, സോനഗഢ - ൩൬൪൨൫൦
൫൨൮ ]യോഗീന്ദുദേവവിരചിത: [ അധികാര-൨ : ദോഹാ-൧൯൭
वस्तु वस्तुरूपेण युगपत् जानन् सन् केन केवल-णाणि लोकालोकप्रकाशकसकल-
विमलकेवलज्ञानेन कथम् अणवरउ निरन्तरम् किं विशिष्टो भवति भगवान्
परमाणंदमउ वीतरागपरमसमरसीभावलक्षणतात्त्विकपरमानन्दमयः केन णियमें निश्चयेन अत्र
संदेहो न कर्तव्य इत्यभिप्रायः ।।१९६।।
अथ
३२८) जो जिणु केवल-णाणमउ परमाणंदसहाउ
सो परमप्पउ परमपरु सो जिय अप्पसहाउ ।।१९७।।
यः जिनः केवलज्ञानमयः परमानन्दस्वभावः
सः परमात्मा परमपरः स जीव आत्मस्वभावः ।।१९७।।
രഹിതപണേ ത്രണ കാളനാ വിഷയോനേ, ലോകാലോകനാ പദാര്ഥോനേ വസ്തുസ്വരൂപേ നിരംതര യുഗപത് ജാണതോ ഥകോ,
ആത്മാ നിശ്ചയഥീ വീതരാഗപരമസമരസീ ഭാവ സ്വരൂപ താത്ത്വിക പരമാനംദമയ ലക്ഷണവാളോ അര്ഹംത ഥായ
ഛേ ഏമാം സംദേഹ ന കരവോ ജോഈഏ, ഏ അഭിപ്രായ ഛേ. ൧൯൬.
വളീ (ഹവേ ഏമ കഹേ ഛേ കേ കേവളജ്ഞാന ജ ആത്മാനോ നിജസ്വഭാവ ഛേ അനേ കേവളീനേ ജ
പരമാത്മാ കഹേ) :
कहलाता है जिसका ज्ञान जाननेके क्रमसे रहित है एक ही समयमें समस्त लोकालोकको
प्रत्यक्ष जानता है, आगे पीछे नहीं जानता सब क्षेत्र, सब काल, सब भावको निरंतर प्रत्यक्ष
जानता है जो केवलीभगवान् परम आनंदमयी हैं वीतराग परमसमरसीभावरूप जो परम आनंद
अतीन्द्रिय अविनाशी सुख वही जिसका लक्षण है निश्चयसे ज्ञानानंदस्वरूप है, इसमें संदेह
नहीं है ।।१९६।।
आगे ऐसा कहते हैं, कि केवलज्ञान ही आत्माका निजस्वभाव है, और केवलीको ही
परमात्मा कहते हैं
गाथा१९७
अन्वयार्थ :[यः जिनः ] जो अनंत संसाररूपी वनके भ्रमणके कारण ज्ञानावरणादि
आठ कर्मरूपी बैरी उनका जीतनेवाला वह [केवलज्ञानमयः ] केवलज्ञानादि अनंत गुणमयी है
[परमानंदस्वभावः ] और इंद्रिय विषयसे रहित आत्मीक रागादि विकल्पोंसे रहित परमानंद ही
जिसका स्वभाव है, ऐसा जिनेश्वर केवलज्ञानमयी अरहंतदेव [सः ] वही [परमात्मा ] उत्कृष्ट