Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
୪୯୮ ]ଯୋଗୀନ୍ଦୁଦେଵଵିରଚିତ: [ ଅଧିକାର-୨ : ଦୋହା-୧୭୩
येन स्वरूपेण ध्यायते आत्मा एषः अनन्तः
तेन स्वरूपेण परिणमति यथा स्फ टिकमणिः मन्त्रः ।।१७३।।
जेण इत्यादि तेण सरूविं परिणवइ तेन स्वरूपेण परिणमति कोऽसौ कर्ता
अप्पा आत्मा एहु एष प्रत्यक्षीभूतः पुनरपि किंविशिष्टः अणंतु वीतरागानाकुलत्व-
लक्षणानन्तसुखाद्यनन्तशक्ति परिणतत्वादनन्तः तेन केन जेण सरूविं झाइयइ येन
शुभाशुभशुद्धोपयोगरूपेण ध्यायते चिन्त्यते द्रष्टान्तमाह जह फ लिहउ-मणि मंतु यथा
स्फ टिकमणिः जपापुष्पाद्युपाधिपरिणतः गारुडादिमन्त्रो वेति अत्र विशेषव्याख्यानं तु‘‘येन
येन स्वरूपेण युज्यते यन्त्रवाहकः तेन तन्मयतां याति विश्वरूपो मणिर्यथा ।।’’ इति
ଭାଵାର୍ଥ :ଜେଵୀ ରୀତେ ସ୍ଫଟିକମଣି ଜପାପୁଷ୍ପାଦିନୀ ଉପାଧିଥୀ ତେ ଉପାଧିରୂପେ ପରିଣମେ
ଛେ ଅନେ ଜେଵୀ ରୀତେ ଗାରୁଡାଦିମଂତ୍ର ଗାରୁଡାଦିରୂପ ଭାସେ ଛେ ତେଵୀ ରୀତେ ଵୀତରାଗ ଅନାକୁଳତା ଜେନୁଂ
ଲକ୍ଷଣ ଛେ ଏଵା ଅନଂତସୁଖାଦି ଅନଂତଶକ୍ତିରୂପେ ପରିଣତ ହୋଵାଥୀ ଜେ ଅନଂତ ଛେ ଏଵୋ ଆ
ପ୍ରତ୍ଯକ୍ଷଗୋଚର ଆତ୍ମା ଜେ ଶୁଭ, ଅଶୁଭ, ଶୁଦ୍ଧଉପଯୋଗରୂପେ ଚିନ୍ତଵଵାମାଂ ଆଵେ ତେ ସ୍ଵରୂପେ ପରିଣମେ
ଛେ.
ଅହୀଂ, ଵିଶେଷ ଵ୍ଯାଖ୍ଯାନ ପଣ ଛେ‘‘येन येन स्वरूपेण युज्यते यन्त्रवाहकः तेन तन्मयतां
याति विश्वरूपो मणिर्यथा ।।’’ (ଅମିତଗତି ଯୋଗସାର ୯. ୫୧) [ଅର୍ଥ:ଵିଶ୍ଵରୂପଧାରୀ ସ୍ଫଟିକନୀ
ଜେମ (ଜେଵୀ ରୀତେ ସ୍ଫଟିକମଣି ସର୍ଵ ପଦାର୍ଥୋନା ରଂଗରୂପେ ପରିଣମେ ଛେ ତେଵୀ ରୀତେ) ଜେ ଜେ ସ୍ଵରୂପେ
ଆତ୍ମା ପରିଣମେ ଛେ ତେ ତେ ରୂପେ ଆତ୍ମା ତନ୍ମଯୀ ଥଈ ଜାଯ ଛେ.]
गाथा१७३
अन्वयार्थ :[एषः ] यह प्रत्यक्षरूप [अनंतः ] अविनाशी [आत्मा ] आत्मा [येन
स्वरूपेण ] जिस स्वरूपसे [ध्यायते ] ध्याया जाता है, [तेन स्वरूपेण ] उसी स्वरूप
[परिणमति ] परिणमता है, [यथा स्फ टिकमणिः मंत्रः ] जैसे स्फ टिकमणि और गारुड़ी आदि
मंत्र हैं
भावार्थ :यह आत्मा शुभ, अशुभ, शुद्ध इन तीन उपयोगरूप परिणमता है जो
अशुभोपयोगका ध्यान करे, तो पापरूप परिणवे, शुभोपयोगका ध्यान करे, तो पुण्यरूप परिणवे,
और जो शुद्धोपयोगको ध्यावे, तो परमशुद्धरूप परिणमन करता है
जैसे स्फ टिकमणिके नीचे
जैसा डंक लगाओ, अर्थात् श्याम, हरा, पीला, लालमेंसे जैसा लगाओ, उसी रूप स्फ टिकमणि
परिणमता है, हरे डंकसे हरा और लालसे लाल भासता है
उसी तरह जीवद्रव्य जिस
उपयोगरूप परिणमता है, उसीरूप भासता है और गारुड़ी आदि मंत्रोंमेंसे गारुडीमंत्र गरुड़रुप