Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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२३८ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४

पत्नीनो स्वामी थाय, राज्यनो स्वामी थाय, संस्थानो स्वामी थाय ए बधा मिथ्याद्रष्टि छे. तथा बोलवानी, चालवानी, खावानी, पीवानी, हरवा-फरवानी ईत्यादि शरीरनी अनेक क्रियाओ थाय त्यां जे शरीरनी क्रियाने अने पोताने एक माने छे ते मिथ्याद्रष्टि छे.

आत्मानी अने पुद्गलनी-बन्नेनी क्रिया एक आत्मा ज करे छे एम माननारा मिथ्याद्रष्टि छे. जड-चेतननी एक क्रिया होय तो सर्व द्रव्यो पलटी जवाथी सर्वनो लोप थई जाय-ए मोटो दोष ऊपजे. आत्माना परिणाम अने शरीर, मन, वाणी, पैसाना परिणाम जो एक होय तो सर्व द्रव्यो पलटी जवाथी सर्वनो लोप थई जाय. मारुं अस्तित्व परथी अने परनुं अस्तित्व माराथी-एम होय तो बधां द्रव्योनो लोप थई जाय ए मोटो दोष उपजे. माटे एम छे नहि एम यथार्थ स्वीकारवुं.

हवे आ ज अर्थना समर्थननुं कळशरूप काव्य कहे छेः-

* कळश प१ः श्लोकार्थ उपरनुं प्रवचन *

‘यः परिणमति सः कर्ता’ जे परिणमे छे ते कर्ता छे, ‘यः परिणामः भवेत् तत् कर्म’ (परिणमनारनुं) जे परिणाम छे ते कर्म छे. जे द्रव्य परिणमन करनार छे ते परिणामनुं कर्ता छे. जडना परिणामनो कर्ता जड छे. खावापीवाना परिणमननी क्रियानुं कर्ता जड द्रव्य छे. परिणमे ते कर्ता छे. आ आंगळी हले ते क्रिया पुद्गलनी छे. तेनो आधार आत्मा नथी. पोताना द्रव्य-गुण-पर्यायनो आधार पोतानो आत्मा छे. परना परिणामनो आधार ते ते परमाणु छे. देहनो आधार आत्मा छे एम माने ते जूठुं छे. लोको कहे छे के जीव छे त्यां सुधी शरीर चाले. पण अहीं कहे छे के शरीरने जीवनो आधार नथी. शरीर शरीरना आधारे छे; आत्माना आधारे शरीर नथी. भाई! आत्मा परनुं कार्य नथी तेम आत्मा परना परिणामनो कर्ता नथी, कारण के जे परिणमे ते कर्ता छे.

दुनिया आवुं माने छे के होशियार माणस दुकानना थडे बेसे तो वेपार-धंधा सारा चाले छे. अहीं कहे छे के वेपारनी क्रिया थाय तेनो कर्ता आत्मा नथी, केमके आत्मा वेपारनी क्रियारूप परिणमतो नथी. रेल्वेमां मालनां वेगन आवे त्यां मालनां रजकणो पोतानी क्रियावती शक्तिथी कार्य करे छे. रेलना डबाना कारणे ते माल आव्यो छे एम नथी. मालनी क्रिया मालमां अने डबानी क्रिया डबामां पोतपोताना कारणे स्वतंत्र थाय छे. आत्मा तो तेनो जाणनार छे, कर्ता नथी. ते पण खरेखर परने जाणतो नथी पण परसंबंधीनुं पोतानुं ज्ञान थयुं तेने जाणे छे. समयसार गाथा ७पमां आवी गयुं के राग थाय तेनुं जे ज्ञान थयुं ते ज्ञान रागनुं नथी पण ते ज्ञान पोतानुं छे. आत्मा पोताने जाणे छे. त्यां सामे जेवी चीज छे तेवुं अहीं ज्ञान थयुं ते ज्ञान पोताथी थयुं छे. राग अने शरीर छे तो तेना कारणे ज्ञान थयुं छे एम नथी. ते चीज संबंधीना ज्ञाननी