Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा ८६ ] [ २४७

परिणतिथी ते पर्याय थाय छे. तो कोई कहे छे के जो कर्मना निमित्त विना विकार थाय तो ते स्वभाव थई जाय! अरे भाई! विभावरूपे थाय ते पण जीवनो पोतानो पर्यायस्वभाव छे. ‘स्वस्य भवनम् स्वभावः’ पोतानी शुद्ध-अशुद्ध पर्यायरूपे परिणमन थाय ते पोतानो स्वभाव छे. आ त्रिकाळी स्वभावनी वात नथी. आ तो पर्यायस्वभावनी वात छे. पर्याय विभावरूप थाय ते पर्यायनो स्वभाव छे.

प्रश्नः– तो शुं कर्म विना विकार थाय छे?

उत्तरः– हा, निश्चयथी कर्म विना विकार पोताथी थाय छे. कर्मनी पर्याय कर्मथी थाय

छे. जीवद्रव्य अने पुद्गलद्रव्य बंने मळीने एक पर्यायरूप परिणमतां नथी. जीवनी पर्यायने जीव करे अने जडकर्म पण करे एम छे नहि. कळशटीकामां कह्युं छे के- “भावार्थ आम छे के जीवद्रव्य-पुद्गलद्रव्य भिन्न सत्तारूप छे ते जो पहेलां भिन्न सत्तापणुं छोडी एक सत्तारूप थाय तो पछी कर्ता -कर्म-क्रियापणुं घटे. ते तो एकरूप थतां नथी तेथी जीव-पुद्गलनुं परस्पर कर्ता-कर्म-क्रियापणुं घटतुं नथी.

अशुद्ध परिणाम एकांत पोताथी थाय छे, कर्मथी बीलकुल नहि-आनुं नाम अनेकांत छे. कर्म पोतानी भिन्न सत्ता छोडी आत्मामां आवी जाय तो ते अशुद्ध परिणामने करे; पण एम बनतुं नथी. तेम जीव पोतानी सत्ता छोडी जडकर्मरूपे थाय तो ते कर्मपरिणामने करे. परंतु पोतानी सत्ता कोई द्रव्य त्रणकाळमां छोडतुं नथी. माटे जीव-पुद्गलनुं परस्पर कर्ता- कर्म-क्रियापणुं घटतुं नथी. पंडित राजमलजीए केटलुं स्पष्ट कर्युं छे. अहो! पहेलांना पंडितोए बहु सरस काम कर्युं छे.

पंडित बनारसीदास तो श्वेतांबरमां जन्मेला. पण दिगंबरनी वात सांभळी त्यां थई गयुं के मार्ग तो आ ज सत्य छे. अहीं कहे छे-बे द्रव्यनी एक परिणति थती नथी; ‘यतः’ कारण के ‘अनेकम् सदा अनेकम् एव’ अनेक द्रव्यो छे ते सदा अनेक ज रहे छे, पलटीने एक थई जतां नथी.

कळशटीकामां कळश पर ना भावार्थमां कह्युं छे के-“ ज्ञानावरणादि द्रव्यरूप पुद्गलपिंड-कर्मनो कर्ता जीव-वस्तु छे एवुं जाणपणुं मिथ्याज्ञान छे, केमके एक सत्त्वमां कर्ता- कर्म-क्रिया उपचारथी कहेवाय छे; भिन्न सत्त्वरूप छे जे जीवद्रव्य अने पुद्गलद्रव्य तेमने कर्ता-कर्म-क्रिया कयांथी घटशे?

आत्मा कर्मबंधननी पर्यायने करे अने जडकर्म जीवना विकारी परिणामने करे एवुं जाणपणुं ए मिथ्याज्ञान छे. एक सत्तामां पण कर्ता-कर्म ना भेद जो उपचार छे तो पर सत्तामां आत्मा करे अने आत्मानी सत्तामां पर करे ए वात त्रणकाळमां सत्य नथी. कर्मथी विकार थाय ए वात तद्दन खोटी छे. अन्यमतवाळा ईश्वरने कर्ता माने अने जैनो जडकर्मने कर्ता माने -ए बधुं समान रीते अज्ञान ज छे. अहीं तो कहे छे के