Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा ८६ ] [ २प१

द्रव्यनी परिणतिना बे कर्ता न होय. द्रव्यनी परिणति ते वस्तु छे अने द्रव्य पण वस्तु छे. द्रव्यनी विकारी पर्याय पण वस्तु छे; ते विकार अवस्तु नथी. पर्याय पण पर्यायपणे वस्तु छे. आत्मानी अशुद्ध परिणति आत्मा पण करे अने जडकर्म पण करे-एम एक परिणतिना बे कर्ता न होय. भाषानी परिणतिने भाषावर्गणा पण करे अने जीव पण करे एम होतुं नथी एम अहीं कहे छे.

‘च’ वळी ‘एकस्य द्वे कर्मणी न’ एक द्रव्यनां बे कर्म न होय. विकारी परिणाम पण

जीवनुं कर्म अने जडकर्मनो जे बंध थाय ए पण जीवनुं कर्म एम एक द्रव्यनां बे कर्म न होय. जडकर्मना उदयनी पर्याय थई ते पुद्गलनुं कर्म अने जीवमां जे विकारी परिणाम थया ते पण पुद्गलनुं कर्म एम एक द्रव्य बे द्रव्योनां कार्य न करे. केटली स्पष्टता करी छे! जीव बोलवानो राग पण करे अने बोलवानी भाषा पण करे एम एक द्रव्य बे कार्य न करे एम सिद्धांत कहे छे.

केटलाक अत्यारे एम कहे छे के विकार परथी थाय छे, पोताथी नहि-एम न माने ते मिथ्याद्रष्टि छे. अरे! लोकोने सत्य मळ्‌युं ज नथी त्यां शुं थाय? भाई! आ तो प्रभुनो मार्ग शूरानो छे, कायरनुं काम नथी. श्रीमदे कह्युं छे ने के-

“वचनामृत वीतरागनां, परम शांत रस मूळ;
औषध
जे भवरोगनां, कायरने प्रतिकूळ.”

विकार पर करावे, मारा पुरुषार्थना दोषथी न थाय-एम जे माने ते कायर छे केमके एने पुरुषार्थ ज जाग्रत नहि थाय. ते अज्ञानी कायर छे. अहीं कहे छे के एक द्रव्यनां बे कर्म एटले कार्य न होय. जड कर्म पोतानुं पण कार्य करे अने जीवना विकारनुं कार्य पण करे-एम न होय. अरे प्रभु! समज्या विना ‘जय भगवान, जय भगवान’ करे पण ए मार्ग नथी. तथा आ बहारनी पंडिताईनो मार्ग नथी. आ तो वस्तुना स्वरूपनी यथार्थ द्रष्टि करवानो मार्ग छे. खरेखर तो जे सम्यग्द्रष्टि छे ते ज पंडित छे; स्वामी कार्तिकेये पण एम कह्युं छे.

‘च’ अने ‘एकस्य द्वे क्रिये न’ एक द्रव्यनी बे क्रिया न होय. पूर्वनी पर्याय पलटीने आत्मा विकाररूपे थाय अने जडकर्मरूपे पण थाय एम एक द्रव्यनी बे क्रिया होती नथी. ‘यतः’ कारण के ‘एकम् अनेकम् न स्यात्’ एक द्रव्य अनेक द्रव्यरूप थाय नहि. केटलुं स्पष्ट कर्युं छे! पोतानी पर्याय परद्रव्यरूप न थाय अने परद्रव्यनी पर्याय पोतानी पर्यायरूप अर्थात् जीवरूप न थाय. एक द्रव्य अनेक द्रव्यनी परिणतिने न करे एम कहे छे.

प्रत्येक द्रव्यनी पर्याय एक पछी एक नियमसर थवानी होय ते ज थाय छे. निर्विकारी पर्याय पण पोताथी एक पछी एक क्रमबद्ध थवानी होय ते ज थाय छे. सर्व-