समयसार गाथा ८९ ] [ २८१
पोताना कारणे थाय छे. धर्मास्तिकाय आदि चार द्रव्यमां तो द्रव्य, गुण अने पर्याय त्रणे शुद्ध छे. तेमां विभाव परिणाम थता नथी. परमाणु अने आत्मा-आ बे द्रव्यमां विभाव परिणाम थाय छे.
आत्माना उपयोगनुं पर उपर लक्ष होवाथी मिथ्याश्रद्धा, अज्ञान अने अविरति एम त्रण प्रकारना विकार उत्पन्न थाय छे. परना कारणे नहि पण परनो संग करवाथी त्रण प्रकारना विकारी परिणाम पोतामां पोताथी उत्पन्न थाय छे. अरे! आटली स्वतंत्रता न बेसे तो ते अंदरमां केम जई शके?
‘उपयोगनो ते परिणामविकार, स्फटिकनी स्वच्छताना परिणामविकारनी जेम, परने लीधे (परनी उपाधिने लीधे) उत्पन्न थतो देखाय छे. ते स्पष्टपणे समजाववामां आवे छेः- ’
स्फटिकमणिमां काळी, पीळी, लीली आदि झांय देखाय छे ते परना संयोगना संगथी पोतामां पोताना कारणे उत्पन्न थाय छे. लोखंडनो चार हाथनो लांबो सळियो एक छेडे गरम थतां बीजे छेडे गरम थई जाय छे; ते पोतानी योग्यताथी थाय छे, अग्निना कारणे नहि. लाकडु चार हाथ लांबु होय तेनो एक छेडो गरम थतां बीजो छेडो गरम थतो नथी, केमके लाकडानी पर्यायनी एवी योग्यता नथी.
अहो! संतोनी केवी करुणा छे! केटलुं स्पष्ट कर्युं छे! परंतु अरे! जीवोने समजवानी दरकार नथी! दुनिया समजे तो मने लाभ छे एम संतोने नथी तथापि विकल्प आव्यो छे तो जगत समक्ष सत्य वात जाहेर करी छे. कहे छे-
‘जेम स्फटिकनी स्वच्छतानुं स्वरूप-परिणमनमां (अर्थात् पोताना उज्ज्वळतारूप स्वरूपे परिणमवामां) समर्थपणुं होवा छतां, कदाचित् स्फटिकने काळा, लीला अने पीळा एवा तमाल, केळ अने कांचनना पात्ररूपी आधारनो संयोग होवाथी, स्फटिकनी स्वच्छतानो, काळो, लीलो, अने पीळो एम त्रण प्रकारनो परिणामविकार देखाय छे.’ जुओ, स्फटिक तो स्वच्छताना स्वरूपपरिणमनमां समर्थ छे. छतां परना संगथी काळा, लीला, पीळा रंगरूपे पर्यायमां परिणमन थाय छे. स्फटिकमां जे काळी झांय देखाय छे ते खरेखर तो पोताना षट्कारकना परिणमनथी थई छे; परना कारणे नहि अने पोताना द्रव्य-गुणना कारणे पण नहि. मार्ग सूक्ष्म छे प्रभु! संतो पोकार करे छे के तारा अपराधथी तारामां राग परिणाम थाय छे, परना कारणे नहि.
कोई कहे के बीजाए गाळ आपी तो मने क्रोध थयो तो ए वात खोटी छे. गाळ तो परचीज छे. तने क्रोध थयो ते तारा कारणे थयो छे, गाळना कारणे नहि. प्रवचनसार गाथा ६७मां कह्युं छे के-रागद्वेष उत्पन्न थवामां विषयो अकिंचित्कर छे. विषयो तो जड छे; तेओ जीवने राग उत्पन्न केम करे? राग पोताथी उत्पन्न थाय छे.