Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 1065 of 4199

 

] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-प प्रकारे थईने, पोते अज्ञानी थयो थको कर्तापणाने पामे छे. विकाररूप परिणमीने जे जे भावने पोतानो करे छे ते ते भावनो ते उपयोग कर्ता थाय छे.

अहाहा...! परमार्थथी तो त्रिकाळी उपयोग शुद्ध, निरंजन, अनादिनिधन छे, ते वस्तुना सर्वस्वभूत छे अने चैतन्यमात्रभावपणे एक प्रकारनो छे. तोपण अशुद्ध, सांजन, अनेकभावपणाने पामतो थको त्रण प्रकारनो थईने पोते अज्ञानी थयो थको कर्तापणाने पामे छे. जुओ, कर्म-निमित्त विकार करावे छे एम नथी. विकारनो कर्ता जड कर्म छे एम नथी. विकाररूप परिणमीने जे जे भावने पोताना करे छे ते ते भावनो ते उपयोग कर्ता थाय छे. मिथ्याद्रष्टि कर्तापणाने पामीने जे जे भावने पोताना करे छे ते ते भावनो ते (उपयोग) कर्ता थाय छे; जडकर्म कर्ता थाय छे एम नथी. कर्म निमित्त हो. निमित्तनी कोणे ना पाडी छे? पण निमित्तना कारणे जीवने पर्यायमां विकार थयो छे एम नथी. स्वयं अज्ञानी थईने उपयोग विकारी भावनो कर्ता थाय छे. उपयोग स्वयं पोताना कारणे अज्ञानी थईने विकाररूप परिणमीने ते ते भावनो कर्ता थाय छे. आवी वात छे. कोई ठेकाणे व्यवहारनुं कथन आवे पण त्यां व्यवहारनुं ज्ञान कराव्युं छे एम समजवुं. व्यवहार निश्चयनुं कर्ता छे एम न समजवुं.

कर्मथी विकार थाय छे ए मोटी गडबड अत्यारे चाले छे. पण ए वात तद्न खोटी छे-एम अहीं सिद्ध करे छे. मिथ्यादर्शन, अज्ञान, अविरतिभावरूप विकारी परिणामनो स्वयं अज्ञानी थईने उपयोग कर्ता थाय छे. अन्यमतवाळा कहे छे के जगतना कार्यनो ईश्वर कर्ता छे अने कोई अज्ञानी एम कहे छे के मारा संसार अने विकारनो कर्ता जड कर्म छे-तो आ बन्नेनी मान्यता एक सरखी जूठी छे. अहीं आ दिगंबर संतोनी जे वाणी छे ते परम सत्य छे. नियमसारमां टीकाकार मुनिराज पद्मप्रभमलधारिदेव कहे छे के-‘‘मारा मुखमांथी परमागम झरे छे.’’ अहा! आवी सत्य वात कोईने न रुचे तो शुं थाय? पण सत्य तो आ ज छे.

निश्चय, व्यवहार, निमित्त, उपादान अने क्रमबद्धपर्याय आ पांच वात खास समजवा जेवी छे. जे समये जे पर्याय थवानी होय ते पर्याय ते ज काळे क्रमसर थाय छे. मोतीनी माळामां प्रत्येक मोती पोतपोताना स्थानमां छे. तेम द्रव्यनी पर्यायमाळामां प्रत्येक पर्याय पोतपोताना काळ-स्थानमां छे. जे पर्यायनो जे काळ होय त्यारे ते ज पर्याय त्यां प्रगट थाय छे. आगळ-पाछळ नहि. आवो निर्णय करवामां पांचे समवाय आवी जाय छे.

-जे समये जे पर्याय थवानी होय ते ज समये ते पर्याय प्रगट थई त्यां काळ आव्यो. -जे पर्याय थवानी छे ते ज थई-एमां भवितव्य आव्युं. -स्वभावना लक्षे आवो निर्णय कर्यो छे-एमां स्वभाव आव्यो.