Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा-९० ] [ वस्तु होवाथी अशुद्धद्रव्यार्थिकनये आत्माने पण कर्ता कहेवामां आवे छे.’ द्रव्यद्रष्टिथी आत्मा रागादि विकारनो कर्ता नथी. द्रव्यस्वभाव विकारनो कर्ता नथी. तेवी रीते द्रव्यद्रष्टि जेने थई छे एवा द्रव्यस्वभावने अनुभवनारा ज्ञानी रागना कर्ता नथी. शुद्ध द्रव्यार्थिकनये आत्मा कर्ता नथी; पण उपयोग अने आत्मा एक होवाथी अशुद्धद्रव्यार्थिक नयथी आत्माने पण कर्ता कहेवामां आवे छे.

अशुद्धद्रव्यार्थिक नय कहो के अशुद्ध निश्चयनय कहो के व्यवहारनय कहो-ए अपेक्षाए आत्माने कर्ता कहेवामां आवे छे.

[प्रवचन नं. १प६ (शेष) * दिनांक १४-८-७६]