समयसार गाथा-९४ ] [ ४१
पुण्यपापना भाव, दया, दान आदि भाव, के सुखदुःखना भाव अने पोतानो त्रिकाळी चैतन्यस्वभावमय आत्मा-ए बेने अज्ञानपणे जीव एक माने छे. कठण पडे छे. पण भाई! सर्वज्ञ वीतरागदेवे पोकारीने कहेलो मार्ग तो आवो ज छे. प्रवचनसारमां छेल्ले ररमा कळशमां कह्युं छे के-‘‘आ रीते (परमागममां) अमंदपणे (जोरथी, बळवानपणे, मोटा अवाजे) जे थोडुंघणुं तत्त्व कहेवामां आव्युं ते बधुं चैतन्यने विषे खरेखर अग्निमां होमायेली वस्तु समान (स्वाहा) थई गयुं.’’ केटलुं कहीए, प्रभु! स्वपरना अज्ञानने कारण मिथ्यादर्शन-अज्ञान- अविरतिरूप जे सविकार चैतन्यपरिणाम छे ते स्वपरने एक माने छे. दर्शनमोहनो उदय छे ते आवुं मनावे छे एम नथी. अरे! अज्ञानीओ तो ज्यां होय त्यां बधे कर्मथी थाय एम लगावे छे, पण एम नथी. कर्म तो बिचारां जड छे. पूजानी जयमालामां आवे छे ने के-
चैतन्यना विकारी परिणाम, अज्ञानथी एम माने छे के विकारी भाव अने त्रिकाळी आत्मा बे एक छे. अहाहा...! दया, दान, व्रतादि भाव अने शुद्ध निर्मळ आत्मा बे एक छे एम अज्ञानथी माने छे. ज्ञानी तो बन्नेनो विशेष एटले भेद जाणे छे. ज्ञानीने राग तो आवे छे. पांचमा गुणस्थान पर्यंत रौद्रध्यान होय छे, क्षायिक समकिती मुनि होय तेने छठ्ठा गुणस्थाने आर्त्तध्यान होय छे. छठ्ठा गुणस्थाने त्रण शुभ लेश्या होय छे. ए लेश्या पण राग छे. छतां ते राग अने आत्मा बे भिन्न छे एम ज्ञानी माने छे.
परंतु अज्ञानी अज्ञानने कारण राग अने व्यवहाररत्नत्रयनो जे विकल्प अने तेमां खुशीपणानो जे भोक्ताभाव ते हुं छुं, ते भाव मारा छे एम बेने एकपणे माने छे, बेनुं एकपणुं जाणे छे अने रागमां एकपणे लीनता करे छे. शुद्ध चैतन्यस्वरूप भगवान आत्मानी लीनता छोडी अज्ञानी रागमां लीनता करे छे. आ रीते समस्त भेदने छुपावीने बेने एकपणे माने छे. विकारी परिणाम अने अविकारी शुद्ध चैतन्यघनस्वरूप आत्मा-ए बेनो समस्त भेद छुपावी दई, ढांकी दई अज्ञानी बेने एकपणे माने छे. अहाहा...! व्यवहाररत्नत्रयनो राग अने हुं एक छीए एम माने ते समस्त भेदने छुपावी दे छे, ढांकी दे छे अने बेना (मिथ्या) अभेदने-एकपणाने प्रगट करे छे. आकरुं लागे पण मार्ग तो आ छे भाई! प्रथम ज श्रद्धामां आ नक्की करवुं पडशे. ज्ञानमां आवो निर्णय तो करे; पछी स्वभावसन्मुखताना प्रयोगनी वात. प्रथम यथार्थ निर्णय करे नहि ते प्रयोग केवी रीते करे?
आ प्रमाणे भाव्यभावकभावने पामेलां एवां चेतन अने अचेतननुं सामान्य अधिकरणथी अनुभवन करवाथी ‘हुं क्रोध छुं’ एवो पोतानो विकल्प उत्पन्न करे छे.