Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 1143 of 4199

 

८२ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-प व्यवहाररत्नत्रयनो कर्ता थतो नथी आ फेंसलो आप्यो. आ कारखानांनी व्यवस्था करवी अने परनां काम करवां ए वात तो कयांय दूर रही गई! ज्ञानी रागनो अने परद्रव्यनो कर्ता नथी.

* * *

हवे आ ज अर्थनुं कळशरूप काव्य कहे छेः-

* कळश प७ः श्लोकार्थ उपरनुं प्रवचन *

‘किल’ निश्चयथी ‘स्वयं ज्ञानं भवन् अपि’ स्वयं ज्ञानस्वरूप होवा छतां-शुं कहे छे? भगवान आत्मा स्वयं त्रण लोकनो जाणनार देखनार छे, जगतनी कोई चीजनो ते कर्ता नथी. आवुं ज तेनुं स्वरूप छे. अहाहा...! मंदिर उपर जेम सोनानो कळश चढावे तेम आचार्यदेवे गाथानी टीका उपर आ कळश चढाव्यो छे. अहा! केट-केटलुं स्पष्ट कर्युं छे! जंगलमां वसनारा दिगंबर मुनिवरने करुणाबुद्धिनो विकल्प आव्यो अने आ शास्त्र रचाई गयां. जगतना प्राणीओने दुःखी-पीडित देखीने ज्ञानी अनुकंपा करवा जता नथी पण एने अंतरमां एम थाय छे के-अरे! आ संसारमां प्राणीओ निज चैतन्यस्वरूपने ओळख्या विना जन्म-मरण करता थका बिचारा दुःखी छे! पंचास्तिकायनी गाथा १३७मां अनुकंपाना स्वरूपनुं कथन कर्युं छे त्यां कह्युं छे के-‘‘ज्ञानीनी अनुकंपा तो नीचली भूमिकाओमां विहरतां (-पोते नीचेनां गुण- स्थानोमां वर्ततो होय त्यारे), जन्मार्णवमां निमग्न जगतना अवलोकनथी (अर्थात् संसार- सागरमां डूबेला जगतने देखवाथी) मनमां जरा खेद थवो ते छे.’’ ज्ञानीने हजु राग छे तेथी हेयबुद्धिए एवो राग आवे छे.

त्यां पंचास्तिकाय गाथा १३६ मां कह्युं छे के-‘‘आ (प्रशस्तराग) खरेखर, जे स्थूळलक्ष्यवाळो होवाथी केवळ भक्ति-प्रधान छे एवा अज्ञानीने होय छे; उपरनी भूमिकामां (-उपरना गुणस्थानोमां) स्थिति प्राप्त न करी होय त्यारे, अस्थाननो राग अटकाववा अर्थे अथवा तीव्र रागज्वर हठाववा अर्थे, कदाचित् ज्ञानीने पण होय छे.’’ प्रशस्तराग कदाचित् ज्ञानीने पण होय छे एटले परिणमननी अपेक्षाथी राग छे पण ज्ञानीने रागमां उपादेयबुद्धि, कर्तव्यबुद्धि होती नथी तेथी ते रागना कर्ता थता नथी.

अज्ञानीने भक्ति, अनुकंपा आदि रागमां उपादेयबुद्धि, कर्तव्यबुद्धि होय छे. ते प्राणीओने दुःखी-पीडित देखीने तेमने हुं आम सुखी करी दउं अने आम जीवाडी दउं-एम अनेक प्रकारे विकल्प करतो थको विकल्पनो कर्ता थाय छे. आ में परनी दया करी ते ठीक कर्युं, तेथी मने धर्म थयो एम अज्ञानीने परमां कर्ताबुद्धि अने रागमां धर्मबुद्धि होय छे तेथी ते कर्ता थाय छे.