Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा-९७ ] [ ८३

अहीं कहे छे-आत्मा स्वयं ज्ञानस्वरूप होवा छतां ‘अज्ञानतः तु’ अज्ञानने लीधे

‘यः’ जे जीव, ‘सतृणाभ्यवहारकारी’ घास साथे भेळसेळ सुंदर आहारने खानारा हाथी आदि तिर्यंचनी माफक ‘रज्यते’ राग करे छे (रागनो अने पोतानो भेळसेळ स्वाद ले छे) ‘असौ’ ते ‘दधीक्षुमधुराम्लरसातिगृद्धया’ दहीं-खांडना अर्थात् शिखंडना खाटा-मीठा रसनी अति लोलुपताथी ‘रसालम् पीत्वा’ शिखंडने पीतां छतां ‘गां दुग्धम् दोग्धि इव नूनम्’ पोते गायना दूधने पीए छे एवुं माननार पुरुषना जेवो छे.

हाथीने घास अने चूरमाना लाडवा भेगा करीने खावा आपो तो ते बन्नेने एक मानीने खाई जाय छे. बेउना स्वादनो भेद छे एवो तेने विवेक होतो नथी. वळी कोई रसनो लोलुपी अत्यंत लोलुपताने कारण शिखंड पीतां छतां हुं गायनुं दूध पीउं छुं एम मानवा लागे छे. समयसार नाटकमां द्रष्टांत आप्युं छे के दारूनो नशो जेने चढयो छे एवा दारूडियाने शिखंड पीवडाववामां आवतां नशाना कारणे स्वाद नहि परखी शकवाथी पोते दूध पी रह्यो छे एम कहे छे. तेम मोहदारूना पानथी जे नशामां छे तेवा अज्ञानीने रागनो (कलुषित) स्वाद अने पोतानो (आनंदरूप) स्वाद भिन्न छे एम भान नथी. तेथी रागनो अने पोतानो भेळसेळ स्वाद ले छे. रागना स्वादने ज ते पोतानो स्वाद माने छे.

* कळश प७ः भावार्थ उपरनुं प्रवचन *

‘जेम हाथीने घासना अने सुंदर आहारना भिन्न स्वादनुं भान नथी तेम अज्ञानीने पुद्गलकर्मना अने पोताना भिन्न स्वादनुं भान नथी; तेथी ते एकाकारपणे रागादिमां वर्ते छे. जेम शिखंडनो गृद्धी माणस, स्वादभेद नहि पारखतां, शिखंडना स्वादने मात्र दूधनो स्वाद जाणे तेम अज्ञानी जीव स्वपरना भेळसेळ स्वादने पोतानो स्वाद जाणे छे.’

अज्ञानीने पोताना अने पुद्गलकर्मना भिन्न स्वादनुं भान नथी. अहीं पुद्गल-कर्मनो अर्थ राग थाय छे. दया, दान व्रत, भक्ति आदिनो राग खरेखर पुद्गल ज छे. तेनो स्वाद अने पोतानो स्वाद भिन्न छे एवुं अज्ञानीने भान नथी. रागनो स्वाद अने आत्मानो स्वाद- ए बेने अज्ञानी जुदा पाडी शक्तो नथी.

अरे! आ मनुष्यभवनां टूकां आयुष्य पूरां करीने जीव चोरासीना अवतारमां कयांय चाल्यो जशे. त्रसनी स्थिति तो मात्र बे हजार सागरनी छे. बे इन्द्रियथी पंचेन्द्रिय सुधीना भव करवानी स्थिति बे हजार सागरनी छे. अरे भाई! जो भेदज्ञान प्रगट न कर्युं तो ते स्थिति पूरी थतां जीव निगोदमां जशे! निगोदवास तो अनंतकाळ अने अपार दुःखथी भरेलो छे. हे भाई! विचार कर.

जेम शिखंडना रसलोलुपीने शिखंडमां खाटा-मीठा स्वादनो भेद भासतो नथी