हवे कहे छे- परंतु जे पुरुषो प्रथम, द्वितीय आदि अनेक पाकोनी परंपराथी पच्यमान अशुद्ध सुवर्ण समान अनुत्कृष्ट मध्यमभावने अनुभवे छे-एटले के जेओने निज शुद्धात्मानी द्रष्टिपूर्वक सम्यग्दर्शन प्रगट थयुं छे, कांईक चारित्र पण प्रगट थयुं छे, पण पूर्ण चारित्र तथा केवळज्ञान नथी तेथी मध्यमभाव वर्ते छे-एवा पुरुषोने अशुद्ध द्रव्यने कहेनारो होवाथी जेणे जुदा जुदा एक एक भावस्वरूप अनेक भावो देखाडया छे एवो व्यवहारनय ते काळे जाणेलो प्रयोजनवान छे. अहीं द्रव्यने अशुद्ध कह्युं एनो आशय एम छे के (१) पर्यायमां पूर्ण शुद्धता नथी तेथी रागादि अशुद्धता पण छे अने (२) पर्यायगत अशुद्धता स्वयं द्रव्यनी छे, परने लईने अशुद्धता के शुद्धता थई छे एम नथी. जुदा जुदा एक एक भावस्वरूप अनेक भावो देखाडया छे एटले पहेला समये जे शुद्धि प्रगटी ते करतां बीजा समये विशेष, त्रीजा समये एनाथीय विशेष एम वधती जाय छे अने साथे साथे अशुद्धि प्रतिसमय क्रमशः घटती जाय छे. आ प्रमाणे शुद्धता-अशुद्धताना अंशो अनेक प्रकारना छे ए देखाडनार व्यवहार ते ते काळे साधकदशामां जाणेलो प्रयोजनवान छे.
द्रष्टिनो विषय जे आत्मा त्रिकाळ ध्रुव एकरूप शुद्ध छे ते निश्चय छे, सत्यार्थ छे. तेनी अपेक्षाए पर्यायने गौण करीने व्यवहार कहीने गाथा ११मां असत्यार्थ कही छे. परंतु अहीं तेनुं अस्तिपणुं स्थापे छे. व्यवहारनयथी द्रष्टिए व्यवहारनय अने एनो विषय छे. एटले शुं? जेम अशुद्ध सोनाने अग्निनी आंच आपतां सोनुं संपूर्ण सोळवलुं शुद्ध न थाय त्यां सुधी अनेक रंगभेद उत्पन्न थाय छे, तेम आत्मामां पूर्ण वीतरागता प्रगट न थाय त्यां सुधी तेनी अवस्थाओ जे भिन्न भिन्न शुद्धता- अशुद्धताना अंशो सहित होय छे-ते व्यवहार छे ते जाणवा योग्य छे, आदरवा योग्य नहीं. त्रिकाळी शुद्ध निश्चय ए एक ज आदरणीय छे. बन्ने आदरणीय होय तो बे नय न थाय. तेथी त्रिकाळी ध्रुव सत्स्वरूप ए आदरणीय छे एम जाणवुं अने व्यवहारनय हेय छे एम जाणवुं ए प्रयोजनवान छे.
भाई! आ तो अंतरनो मार्ग ऊंडा रहस्यथी भरेलो छे. एने समजवा माटे घणी पात्रता अने होंश केळववी जोईए. नियमसारमां कह्युं छे के संवर, निर्जरा, मोक्षनी पर्याय एक समयनी छे, नाशवान छे, तेथी हेय छे. पण अहीं तो एम कह्युं के पर्याय भले नाशवान अने हेय छे, पण ए जाणवा लायक छे. ए व्यवहारनयनो विषय छे. नय छे तो एनो विषय पण छे. निश्चयना काळमां निश्चयने उपादेय जाणवो एटले के द्रव्यने अभेद अनुभववुं ते कार्यकारी छे. तेम व्यवहारना काळमां व्यवहारने हेयपणे जाणवो ए प्रयोजनभूतछे. आ प्रमाणे बन्ने नयो कार्यकारी समजवा.