Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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भाग-१ ] १६प

पूर्णस्वरूप छे तेनां श्रद्धा, ज्ञान अने आचरणरूप प्राप्ति थईने पूर्णदशा प्राप्त थई गई छे एमने तो पुद्गलसंयोगजनित अनेकरूपपणाने कहेनारो अशुद्धनय कांई प्रयोजननो के मतलबनो नथी, केमके अशुद्धता छे ज नही. पण ज्यांसुधी पूर्ण शुद्ध स्वभावनी प्राप्ति थई नथी त्यांसुधी जेटलुं अशुद्धनयनुं कथन छे तेटलुं यथापदवी जाणवा माटे प्रयोजनवान छे. केटलाक लोको आमांथी एम अर्थ काढे छे के १२मी गाथामां व्यवहार करवो एम कह्युं छे. पण खरेखर एम छे ज नहीं. अहीं तो जणाव्युं छे के ए काळे आवो व्यवहार होय छे. सम्यग्दर्शननी प्राप्ति थई छे, पण पूर्णदशा थई नथी एने आवो व्यवहार वच्चे आव्या विना रहेतो नथी.

ज्यांसुधी यथार्थ ज्ञान-श्रद्धाननी प्राप्तिरूप सम्यग्दर्शननी प्राप्ति थई न होय त्यांसुधी तो जेनाथी यथार्थ उपदेश मळे छे एवां जिनवचनो सांभळवां. आवो भाव सम्यग्दर्शन थवा पहेलां होय छे एनी वात छे. अहीं ‘यथार्थ उपदेश एना’ पर वजन छे. आम ज्यां त्यांथी कहे छे के दान करो, व्रत करो, तो समकित थशे अने धर्म थशे तो ए जिनवचन नथी, यथार्थ उपदेश नथी. आ उपदेश सांभळवा लायक नथी. जेमां सम्यग्दर्शनादि वीतरागतानुं प्रयोजन प्रगट होय ते यथार्थ उपदेश छे. पंचास्तिकायमां शास्त्रनुं तात्पर्य वीतरागता छे एम कह्युं छे. तथा आत्मावलोकन शास्त्रमां आवे छे के- मुनिओ वारंवार (मुहुर्मुहुः) वीतरागभावनो उपदेश आपे छे. एटले निमित्त, राग अने पर्यायथी लक्ष फेरवी त्रिकाळी ज्ञायकभावनुं लक्ष करो जेथी सम्यग्दर्शनादि वीतरागतारूप धर्म थाय. आवो उपदेश ते यथार्थ उपदेश छे, केमके वीतरागभाव एकमात्र स्वद्रव्यना ज आश्रये थाय छे.

वळी जेमनाथी उपदेश मळे एम न कहेतां जेमनाथी यथार्थ उपदेश मळे एम भाषा वापरी छे. एमां पण भाव छे. अहीं उपदेश संभळावनार गुरु पण वीतरागी सत्पुरुष ज होवा जोईए. ज्यां त्यां माथां फोडे तो मिथ्यात्वनी ज पुष्टि थाय छे. तेथी यथार्थ उपदेशदातानो पण निर्णय करवानी जवाबदारी छे. जे सत्पुरुषना वचनो वीतरागतानी पुष्टि करे तेमनां ज वचनो सांभळवा योग्य छे. एवा सत्पुरुष पण शोधी काढवा पडशे. श्रीमदे कह्युं छे ने के ‘सत्पुरुषने शोध’. उपदेश अने उपदेशक बन्ने वीतरागतानां पोषक होवां जोईए. जुओ, निमित्त पण यथायोग्य होय छे. वीतरागनां वचनो तो एवां होय छे के ते एकदम आत्मानो आश्रय करावी परनो आश्रय छोडावे छे.

जिनवचनो सांभळवां, गुरुनां वचनो सांभळवां ए छे तो शुभ विकल्प. पण जे ते काळे आवो विकल्प होय छे. अहीं सम्यग्दर्शन पामवा माटे जिनवचन सांभळवुं एम