हवे कहे छे-आस्रव थवा योग्य अने आस्रव करनार-ए बन्ने आस्रव छे. पुण्य-पापना भावपणे थवा लायक जीवनी पर्याय ए भाव-आस्रव अने तेमां कर्मनुं जे निमित्त ते द्रव्य-आस्रव. ए द्रव्य-आस्रवने अहीं करनार कह्यो छे. नवां कर्म आवे ते द्रव्य-आस्रव ए वात अहीं नथी. आ तो पूर्वनां जूनां कर्म जे निमित्त थाय तेने द्रव्य-आस्रव कह्यो छे. ए बन्ने आस्रव छे-एक भाव-आस्रव अने बीजो द्रव्य- आस्रव. संवर थवा योग्य संवार्य ए जीवनी पर्याय छे. ते भाव-संवर छे. संवर करनार संवारक ए निमित्त छे. संवरनी सामे जेटलो कर्मनो उदय नथी (अभावरूप छे) एने द्रव्य-संवर कहे छे. ए बन्ने संवर छे-एक भाव-संवर अने बीजो द्रव्य- संवर. निर्जरवा योग्य अने निर्जरा करनार-बन्ने निर्जरा छे. निर्जरवा योग्य अशुद्धता अने थवा योग्य शुद्धता ए जीवनी पर्याय छे. ए भाव-निर्जरा छे. निर्जरा करनार(द्रव्य-कर्मनुं खरी जवुं) ए निमित्त छे-ए द्रव्य-निर्जरा छे. ए बन्ने निर्जरा छे. बंधावा योग्य अने बंधन करनार-ए बन्ने बंध छे. बंधावा योग्य जीव (पर्याय) छे. रागद्वेष, मिथ्यात्व, विषयवासना-एमां अटकवा योग्य, बंधावा योग्य लायकात जीवनी पर्यायनी छे, ते भावबंध छे. सामे पूर्वकर्मनुं निमित्त छे ए बंधन करनार छे. नवो बंध थाय एनी वात अहीं नथी. आ तो पूर्व कर्म जे निमित्त थाय छे एने अहीं द्रव्यबंध कह्यो छे. भगवान आत्मा तो अबद्ध-स्पृष्ट छे, पण एनी पर्यायमां बंधयोग्य लायकात छे ते (जीव) भावबंध छे अने बंधन करनार कर्म- निमित्त छे ते द्रव्यबंध छे. आम ए बन्ने बंध छे. मोक्ष थवा योग्य अने मोक्ष करनार-ए बन्ने मोक्ष छे. मोक्ष थवा योग्य जीवनी पर्याय छे. जीवनी पर्यायमां मोक्ष थवानी लायकात छे. त्रिकाळी चीज छे ए तो मोक्षस्वरूप ज छे. मोक्ष थवा योग्य जीवनी पर्याय ते भावमोक्ष छे. अने सर्व कर्मना अभावरूप निमित्त ते मोक्ष करनार द्रव्य-मोक्ष छे. आम ए बन्ने मोक्ष छे. हवे कहे छे- एकने ज पोतानी मेळे एटले के पोतानी एकपणानी अपेक्षाए पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बंध अने मोक्षनी उत्पत्ति बनती नथी. निमित्त- नैमित्तिक संबंधनी अपेक्षा विना एकने नव साबित थता नथी. एकने पर्यायमां बीजानुं निमित्त छे. एनाथी आ नव भेदो ऊभा थाय छे. ते बन्नेमां एक जीव अने बीजुं अजीव छे. हवे बाह्य (स्थूल) द्रष्टिथी जोईए तोः- जीव-पुद्गलना अनादि बंधपर्यायनी समीप जईने एटले के पर्यायद्रष्टि करीने आ योग्यता अने आ निमित्त ए बेने एकपणे