Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 2068 of 4199

 

समयसार गाथा-२०३ ] [ १पप चैतन्यधाम प्रभु आत्मामां रागनी विपदानो अभाव छे. ‘विपदां अपदम्’ विपदानुं ते अपद छे अर्थात् रागनुं अपद छे केमके राग विपदा ज छे. आवो वीतरागनो मारग शूराओनो मारग छे प्रभु! कायरोनुं त्यां काम नथी.

अहा! भाषा तो बहु टूंकी करी छे के-एक ज पद अर्थात् आनंदकंद प्रभु आत्मा एक ज आस्वाद करवा लायक छे, के जे विपदाओनुं अपद छे. आ विकल्प-रागादि जे छे ते विपदा छे. पंचमहाव्रतना विकल्प के शास्त्र भणवानो विकल्प विपदा छे अने भगवान आत्मा ते विपदानुं अपद छे, अर्थात् आत्मामां ते विपदा नथी. आवुं सांभळीने रागना पक्षवाळा राड नाखे छे, पण शुं थाय! स्वरूप ज एवुं छे. अव्रतना परिणाम छे ते पाप छे ने व्रतना परिणाम छे ते पुण्य छे. ते बन्ने विपदा छे अने भगवान आत्मा ते सर्व विपदानुं अपद छे, अस्थान छे. ल्यो, आवुं स्पष्ट छे तोय लोको पुण्यने धर्म माने छे! पण बापु! सर्वज्ञ परमेश्वरनो शुं हुकम छे अने तुं शुं माने छे ए जरी मेळव तो खरो.

कोई तो आ सोनगढनुं एकलुं निश्चय छे, निश्चय छे-एम कही विरोध करे छे. पण कोनो विरोध? अहींनो विरोध नथी; भाई! तने खबर नथी बापा! के तुं तारो ज विरोध करे छे. अरे प्रभु! तुं शुं करे छे? तुं भगवान छो ने प्रभु! तुं तने भूली गयो! केवळी परमात्माए तो एम जोयुं ने कह्युं छे के एक द्रव्यमां अन्यद्रव्यनो बहिष्कार छे. अरे! तारा ज्ञायकस्वभावमां रागनोय बहिष्कार छे. कळशमां छे ने के-‘विपदाम् अपदम्’–ज्ञायक प्रभु आत्मा विपदाओनुं-रागादिनुं अपद छे. अहा... हा... हा...! शुं कळश मूकयो छे! कहे छे-रागादि रहित तारुं आनंदमय पद छे ते एकनो ज अनुभव करवा योग्य छे, माटे तेनो आस्वाद कर, अनुभव कर.

हवे कहे छे-‘यत् पुरः’ जेनी आगळ ‘अन्यानि पदानि’ अन्य (सर्व) पदो ‘अपदानि एव भासन्ते’ अपद ज भासे छे.

अहा... हा... हा...! एकला ज्ञान ने आनंदनो पिंड प्रभु आत्मा भगवान छे. भग नाम अनंत ज्ञान अने आनंदनी लक्ष्मी अने वान नाम स्वरूप. आम अनंत ज्ञानानंदनी लक्ष्मीस्वरूपे ज भगवान आत्मा छे. ते एक ज आस्वादवायोग्य निज पद छे. अहीं कहे छे-तेनी आगळ बीजां सर्व शुभाशुभ रागनां पदो अपद ज भासे छे, दुःखनां पद ज भासे छे. भगवान! तारा निराकुल आनंदना स्वाद आगळ व्रत, भक्ति आदिना विकल्प अपद ज भासे छे, दुःखरूप ज भासे छे. भाई! जे वडे तीर्थंकर नामकर्म बंधाय ते भाव पण अपद एटले दुःख-विपदा ज भासे छे. आवी झीणी वात छे.

हा, पण लक्ष्मी अने स्त्रीमां तो सुख छे ने?