१६६ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-७
प्रश्नः– सामान्यनो स्वाद शुं? भोगवटो तो पर्यायमां थाय छे? समाधानः– भाई! सामान्यनो स्वाद न आवे केमके स्वाद छे ए तो पर्याय छे. परंतु त्रिकाळी अभेदना लक्षे पर्यायमां स्वाद आव्यो तो सामान्यनो स्वाद छे एम अभेद करीने कहेवाय छे.
तो शुं त्रिकाळीनुं ज्ञान ने स्वाद पर्यायनो? हा, त्रिकाळीनो स्वाद न होय; पण सामान्यनुं लक्ष करीने जे पर्यायनो स्वाद आव्यो तेने सामान्यनो स्वाद छे एम कहेवाय छे, बाकी सामान्यना स्वादमां सामान्यनो अनुभव नथी. वळी विशेषनो (पर्यायनो) एटले विशेषना लक्षे जे स्वाद छे ते रागनो आकुळतामय स्वाद छे अने सामान्यनो स्वाद अरागी निराकुल आनंदनो स्वाद छे. स्वाद छे तो पर्याय अने सामान्य कांई पर्यायमां आवतुं नथी, सामान्य जे त्रिकाळी एकरूप ध्रुव छे ते पर्यायमां न आवे पण सामान्यनुं जेटलुं ने जेवुं स्वरूप छे तेटलुं ने तेवुं पर्यायमां ज्ञानमां आवे छे अने तेने सामान्यनो स्वाद आव्यो एम कहेवाय छे. आवी वात छे.
अहाहाहा...! कहे छे-एक ज्ञान ज ज्ञेयरूप थाय छे, अर्थात् ज्ञान नाम आत्मा जे त्रिकाळी, एकरूप छे ते एक ज ज्ञाननी पर्यायमां ज्ञेयरूप थाय छे; मतलब के बीजा ज्ञेय ते काळे ज्ञानमां आवता नथी. शुं कह्युं आ? के वर्तमान ज्ञाननी पर्यायमां आखो ज्ञानस्वरूपी आत्मा ज्ञेयरूप थई जाय छे अने ज्ञानमां जे परज्ञेय-रागादि हता ते छूटी जाय छे. प्रवचनसारमां (गाथा १७२ मां) अलिंगग्रहणना २० मा बोलमां न आव्युं के- प्रत्यभिज्ञाननुं कारण एवुं जे सामान्य द्रव्य तेने आलिंगन कर्या विना शुद्ध पर्याय ते आत्मा छे. एटले के आनंदनी पर्याय ते आत्मा छे, केमके स्वादमां पर्यायनो स्वाद आवे छे. छतां सामान्यना लक्षे जे स्वाद आव्यो तेने सामान्यनो स्वाद कहेवामां आवे छे. अने भेदना लक्षे जे स्वाद आवे तेने भेदनो-विकारनो स्वाद कहेवामां आवे छे.
कोईने थाय के आवी वात ने आवो उपदेश? पण बापु! आ तो तारा माटे भगवान केवळीनां रामबाण वचन छे. माटे परनो महिमा मटाडी अंदर जा ज्यां त्रणलोकनो नाथ भगवान आत्मा विराजे छे.
हवे कहे छे-‘अहीं प्रश्न थाय छे के छद्मस्थने पूर्णरूप केवळज्ञाननो स्वाद कई रीते आवे?’ एम के तमे तो आत्मानो स्वाद-आत्मानो स्वाद-पूर्णज्ञाननो स्वाद आत्माने आवे छे एम खूब कहो छो. परंतु जे हजी छद्मस्थ छे, जेने हजी आवरण छे, जे हजी अल्पज्ञ छे तेने पूर्णरूप एवा केवळज्ञाननो स्वाद केवी रीते आवे छे?
उत्तरः– ‘आ प्रश्ननो उत्तर पहेलां शुद्धनयनुं कथन करतां देवाई गयो छे’ ते