ज्ञायक छे; आ अनुभूतिने शुद्धनय कह्यो छे. गाथा ६ मां एम कह्युं के-ज्ञायकभाव छे ते शुभाशुभभावना स्वभावरूपे थतो नथी. शुभाशुभभाव अचेतन छे, अने ज्ञायक छे ते चेतन-ज्ञानरसरूप छे, ते कदीय अचेतनरूप थतो नथी तेथी ते प्रमत्त पण नथी अने अप्रमत्त पण नथी. प्रमत्त-अप्रमत्त जे संयोगजनित पर्यायो छे तेथी ज्ञायक भिन्न छे. पहेला गुणस्थानथी छठ्ठा गुणस्थान सुधी प्रमत्त अने सातमाथी चौदमा गुणस्थान सुधी अप्रमत्त गुणस्थानो छे. बन्नेमांथी कोई ज्ञायकमां नथी. आ द्रव्यद्रष्टिनो विषय छे. पण अहीं तो जे ज्ञाननी पर्यायमां आत्मानी-ज्ञायकनी अनुभूति थई के आत्मा आवो अबद्धस्पृष्ट छे तेने शुद्धनय कह्यो छे. आ अनुभूति आत्मा ज छे. रागादि ते आत्मा नथी. वळी गाथा ६ मां आवे छे के-ते ज (ज्ञायक) अन्यद्रव्योना भावोथी भिन्नपणे उपासवामां आवतो ‘शुद्ध’ कहेवाय छे. एटले परद्रव्योनुं लक्षछोडी एक निज ज्ञायकनुं लक्ष करतां जे शुद्धता प्रगट थाय ते शुद्धतामां आ ‘शुद्ध’ छे एवुं भान थाय छे. एवुं भान थया विना, जाण्या विना ‘शुद्ध’ छे एम केवी रीते कहेवाय? त्रिकाळी शुद्ध छे एने जाण्या विना त्रिकाळी शुद्ध कयांथी आव्यो? आ त्रिकाळी शुद्धने जाणनारी जे पर्याय (ज्ञाननी) तेने शुद्धनय कहे छे. आस्रव अधिकारमां आवे छे के शुद्धनयनी पूर्णता केवळज्ञान थतां थाय छे. एटले के पूर्ण केवळज्ञान ज्यारे प्रगट थाय त्यारे शुद्धनयनो आश्रय करवानो रहेतो नथी ते अपेक्षाए शुद्धनयनी पूर्णता थई गई एम कहेवामां आव्युं छे. त्यारे अहीं तो ज्ञायकने विषय करनारी पर्यायने अनुभूति अथवा शुद्धनय कहे छे अने ते आत्माना ज परिणाम छे तेथी अनुभूति आत्मा ज छे एम कह्युं छे. एक बाजु कहे के अनुभूतिना परिणाम आत्माथी भिन्न नथी अने वळी बीजे ठेकाणे एम कहे के केवळज्ञाननी पर्याय पण आत्माथी भिन्न छे, बहिःतत्त्व छे. अंतःतत्त्व एक आत्मा ज्ञायक छे. अपेक्षा शुं छे ते बराबर जाणवुं जोईए. केवळज्ञानने बहिःतत्त्व कह्युं त्यां तो केवळज्ञान पर्याय छे अने तेना आश्रये धर्म थतो नथी-पर्यायमांथी नवी पर्याय न आवे पण एक ज्ञायकभावना आश्रये ज धर्म प्रगट थाय छे ए वात बतावी छे. अहाहा...! शुद्धनयनो विषय तो द्रव्य एकलुं ज छे. पण द्रव्यनुं लक्ष करवाथी परिणति शुद्ध प्रगट थई जाय छे त्यारे प्रमाणज्ञान थई जाय छे. त्यां कोई प्रश्न करे के निश्चयनय तो एकला त्रिकाळीने जाणे छे अने प्रमाण तो त्रिकाळी अने पर्याय बन्नेने एक काळमां जाणे छे तो शुद्ध कोण? (पूज्य कोण?) निश्चयनय के प्रमाण? उत्तरः