Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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भाग-१ ] २६१

प्रवचनसारमां ४७ नयोमां अशुद्धनय अने शुद्धनयनी वात आवे छे. तेमां माटीने वासण-घटादिथी जुए ते अशुद्धनय छे अने माटीने एकली माटी-माटी- माटीसामान्य जुए ते शुद्धनय छे. तेम भगवान आत्माने ज्ञान, दर्शन, चारित्रनी पर्यायथी जोवो ते अशुद्धनय छे अने त्रिकाळ एकरूप चैतन्यसामान्यपणे जोवो ते शुद्धनय छे. आवा शुद्धनयना विषयभूत चैतन्यसामान्य त्रिकाळी द्रव्यनो अनुभव करवो तेने अहीं जैनशासन कहे छे. * गाथा –१पः टीका उपरनुं प्रवचन * जे आ अबद्धस्पृष्ट आदि पांचभावोस्वरूप आत्मानी अनुभूति छे एटले के पांचभावस्वरूप आत्माने शुद्धोपयोगवडे देखे छे, जाणे छे, अनुभवे छे ए खरेखर समस्त जिनशासननो अनुभव छे. आ जैनमार्ग छे, मोक्षमार्ग छे. आमां कोई राग के व्यवहार तो आव्यो नहीं? भाई, व्यवहार के राग ए जैनशासन ज नथी. पूर्ण वीतरागता नथी त्यां सुधी साधकने राग आवे छे खरो, पण ए जैनधर्म नथी. जैनशासन एतो शुद्धोपयोगमय वीतरागी परिणति छे. सम्यग्दर्शन आदि रत्नत्रयपरिणति ए शुद्धोपयोगमय वीतरागी परिणति छे. ए जैनधर्म, जैनशासन छे. श्री जयसेनाचार्यनी टीकामां लीधुं छे के -आत्मपदार्थनुं वेदन-अनुभव -परिणति ए जैनशासन-जैनमत छे. हवे कहे छे के आ जैनशासन अर्थात् अनुभूति ते शुं छे? श्रुतज्ञान पोते आत्मा ज छे. भावश्रुतज्ञान-शुद्धोपयोगथी जे आत्मानो अनुभव थयो ए आत्मा ज छे. स्वरूपनी वीतराग स्वसंवेदनदशा-प्रत्यक्ष ज्ञाननी अनुभूति जे प्रगट थई ए आत्मा ज छे. रागादि जे छे ते आत्मा नथी, अनात्मा छे. धर्मीने पण अनुभूति पछी जे राग आवे छे ते अनात्मा छे. द्रव्यश्रुतमां आ कह्युं छे अने ए ज अनुभवमां आव्युं. माटे ज्ञाननी अनुभूति ते ज आत्मानी अनुभूति छे; केमके भावश्रुतमां जे त्रिकाळी वस्तु जणाई ते वीतरागस्वरूप छे अने एनी अनुभूति प्रगट थई ए पण वीतराग परिणति छे. भगवान आत्मा त्रिकाळ मुक्तस्वरूप ज छे. एनो पर्यायमां अनुभव थयो ए भावश्रुतज्ञान छे, शुद्धोपयोग छे. ए आत्मानी ज जात होवाथी आत्मा ज छे. अनुभूतिमां पूरा आत्मानो नमूनो आव्यो माटे ते आत्मा ज छे. तेथी द्रव्यनी अनुभूति कहो के ज्ञाननी अनुभूति कहो-एक ज चीज छे. ‘ज’ शब्द लीधो छे ने? एकांत लीधुं. सम्यक् एकांत छे. कथंचित् रागनी अनुभूति ए आत्मा एम छे नहीं. सर्वज्ञ-स्वभावी ‘ज्ञ’ स्वभावी आत्मा एकलो ज्ञानस्वभावी छे अने एनी अनुभूति ज्ञानस्वरूप ज छे. अहाहा! शुं भगवाननी वाणी! चैतन्यचमत्कार जागे एवी चमत्कारिक वाणी छे.