‘अलुब्ध ज्ञानीओने तो जेम सैंधवनी गांगडी, अन्यद्रव्यना संयोगनो व्यवच्छेद करीने केवळ सैंधव नो ज अनुभव करवामां आवतां, सर्वतः एकक्षाररसपणाने लीधे क्षारपणे स्वादमां आवे छे तेम आत्मा पण, परद्रव्यना संयोगनो व्यवच्छेद करीने केवळ आत्मानो ज अनुभव करवामां आवतां, सर्वतः एक विज्ञानघनपणाने लीधे ज्ञानपणे स्वादमां आवे छे.’ जेम लवणना गांगडानो, अन्यद्रव्यना संयोगनो निषेध करीने केवळ लवणना गांगडानो अनुभव करवामां आवे तो सर्वत्र क्षाररसपणाने लीधे ते क्षारपणे स्वादमां आवे छे. लवणनो गांगडो सीधो लवण द्वारा स्वादमां आवे छे ए यथार्थ छे. एवी रीते अलुब्ध ज्ञानीओने एटले जेमने ईन्द्रियोना समस्त विषयो के जे परज्ञेयो छे एमनी आसक्ति-रुचि छूटी गई छे एवा ज्ञानीओने पोताना सिवाय अन्य समस्त परद्रव्य अने परभावनुं लक्ष छोडी दईने एक ज्ञायकमात्र चिद्घनस्वरूपनो अनुभव करतां, सर्वतः एकविज्ञानघनपणाने लीधे ते ज्ञानरूपे स्वादमां आवे छे. एकलुं ज्ञान सीधुं ज्ञानना स्वादमां आवे छे ए आनंदनुं वेदन छे. ए जैनशासन छे. एनुं नाम सम्यग्दर्शन अने ज्ञाननी अनुभूति छे. एक बाजु स्वद्रव्य छे अने बीजी बाजु समस्त परद्रव्य छे. एक बाजु राम अने बीजी बाजु गाम. गाम एटले (परद्रव्यनो) समूह. पोताना सिवाय जेटलां परद्रव्यो छे ते गाममां जाय छे. परज्ञेयो-पंचेन्द्रियना विषयो -पछी ते साक्षात् भगवान, भगवाननी वाणी, देव, गुरु शास्त्र, अने शुभाशुभ राग ए सघळुं गाममां एटले परद्रव्यना समूहमां आवी जाय छे. एना तरफ लक्ष जतां राग ज उत्पन्न थाय छे. समोसरणमां साक्षात् भगवान बिराजमान होय. तेमनुं लक्ष करतां राग ज उत्पन्न थाय. ए अधर्म छे. ए कांई चैतन्यनी गति नथी. ए तो विपरीत गति छे. मोक्षपाहुडमां कह्युं छे के परदव्वादो दुग्गइ’ तेथी परद्रव्यथी उदासीन थई एक त्रिकाळी ज्ञायकभाव जे सर्वतः ज्ञानघन छे ते एकनो ज अनुभव करतां एकला (निर्भळ) ज्ञाननो स्वाद आवे छे. ए जैनदर्शन छे. ईन्द्रियोना विषयोमां राग द्वारा जे ज्ञाननो अनुभव (ज्ञेयाकार ज्ञान) ते आत्मानो स्वाद-अनुभव नथी, ए जैनशासन नथी. आत्मामां भेदना लक्षे जे राग उत्पन्न थाय ते रागनुं ज्ञान थाय छे एम मानवुं ए अज्ञान छे, मिथ्यादर्शन छे. एक ज्ञान द्वारा ज्ञाननुं वेदन ए ज सम्यक् छे, यथार्थ छे. अहो! समयसार विश्वनुं एक अजोड चक्षु छे. आ वाणी तो जुओ. सीधी एने आत्मा तरफ लई जाय छे. समयसार शास्त्र-वाणी ए वाचक छे अने पोतानामां रागादिरहित जे समयसार छे ए वाच्य छे. अत्यारे तो लोको बहारमां पडया छे. आ करो ने ते करो. कोई कहे