२८ ] [ गाथा-१७-१८ छे, भाई! दुनिया अनेक प्रकारे विचित्र छे. तेनी साथे मेळ करवा जईश तो मेळ नहि खाय.
आत्मा ए अखंड वस्तु अने जाणवुं ए पर्याय छे. भगवान अमृतचंद्राचार्य मुनिसंत एनी टीका करे छे. ए गाथामां भरेला सामान्यभावने विशेष स्पष्ट करे छे. माणसो नथी कहेता के-‘तु मारी टीका करे छे?’ एटले के तुं केवो छे एनी टीका कहेतां विशेष स्पष्टता करे छे. एम अहीं आत्मा केवो छे एनी टीका करी छे. भगवानना दिव्यध्वनिनी संतोए टीका करी छे. अहीं टीकामां प्रथम एटले सौ पहेलां आत्मा जाणवो एम लीधुं छे. नवतत्त्वने जाणवां के रागने जाणवो ए अहीं न लीधुं. एकने जाणे ते सर्वने जाणे छे. ज्ञाननी पर्यायमां आखो आत्मा ज्ञेय पणे जणाय अने सौ प्रथम आ ज करवानुं छे. छठ्ठी गाथामां कह्युं के जे ज्ञायकभाव-स्वभाव छे ए शुभाशुभभावना स्वभावे थतो नथी, केम के शुभ के अशुभभावो अचेतन छे. ए चैतन्यरस अचेतनपणे केम थाय?
ज्ञायकभाव एकरूप चैतन्यवस्तु छे. आवो जे ज्ञायकभाव आत्मा एने प्रथम जाणवो एम आचार्य कहे छे. आचार्योए थोडुं लख्युं घणुं करीने जाणजो. भाई! छहढाळामां आवे छे केः-
लाख वात करी, अनंत वात करी. पण वात ए छे के निज आत्मानुं ध्यान करो. एटले पर्यायमां एने जाणो. एम कहीने एम सिद्ध कर्युं के रागनी मंदताथी आत्मानुं ज्ञान थाय एम कोई कहेता होय तो ए वस्तुस्थिति नथी. हमणां बहु चाले छे के-पहेलां व्यवहाररूप दया, दान इत्यादि रागनी मंदता करीए, पहेलुं चारित्र केटलुंक थाय पछी ज समक्ति थाय. अरे भगवान! चारित्र समक्ति विना कदी थतुं नथी. वळी कोई एक जणे तो एम कह्युं छे के सातमुं गुणस्थान आव्या विना निश्चय समक्ति थाय नहीं. पण एम नथी, भाई! आ तो मोक्षार्थी जेने मोक्ष करवो छे एने पहेलां जाणे. स्वसंवेदन-ज्ञानथी प्रथम आत्माने जाणवो, पछी तेनुं ज श्रद्धान करवुं एम अहीं छे ने?
रत्नकरंडश्रावकाचारमां एम आवे छे के सम्यग्दर्शन करो, अने पछी ज्ञाननुं आराधन करवुं, एटले के रागद्वेष टाळवा माटे चारित्र ग्रहण करवुं आराधन करवुं एटले विशेष (मग्नता करवी), अहीं सम्यग्दर्शन थतां ज्ञान साथे ज होय छे एम कह्युं छे. तत्त्वार्थसूत्रमां “सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः” तथा छहढाळामां (चोथी ढाळमां) “सम्यक् कारण जान, ज्ञान कारज है सोई.” ए प्रमाणे लीधुं छे. दर्शननी पूर्णता पहेली थाय छे एटले त्यां दर्शनने पहेलुं लीधुं. अहीं ज्ञानथी वात उपाडीने तेने पहेलुं केम कह्युं के-पहेलां जाण्या विना प्रतीति (श्रद्धा) कोनी? जे वस्तु ज्ञानमां जणाई नथी एनी प्रतीति शानी?