गाथा-१९] [ प७ एने जाणवुं ए तो पर्यायनो ते क्षणनो धर्म छे. खरेखर तो ए ज्ञेय संबंधी पोतानी जे ज्ञाननी परिणति एने ए जाणे छे. आ बधा (अज्ञानी) कहे छे के देव-गुरुनी भक्ति करो, तेथी एमांथी मार्ग मळी जशे. अहीं कहे छे के भक्ति ए राग छे. ए राग जे थाय ते ज समयनुं ज्ञान स्व अने परने जाणतुं परिणमे एवी पर्यायनी ताकातथी ए रागने जाणी रह्युं छे. रागने जाणी रह्युं छे ए पण व्यवहारथी छे. निश्चयथी तो राग संबंधी ज्ञान अने पोता संबंधी ज्ञानने जाणी रह्युं छे. मूळ वात-प्रथम दशा समजाय नहि अने पछी चारित्र अने व्रत कयांथी आवे? मूळ एकडा विनानां मींडां शा कामनां?
भगवान आत्मा ज्ञायकभावस्वभावरूप छे. एमां व्यवहाररत्नत्रयनो जे राग थाय ते रागसंबंधीनुं पण ते काळे पोतानुं ज्ञान परिणमे छे. ए ज्ञेयाकारे परिणमे छे एम कहेवुं ते व्यवहार अने ए ज्ञानाकारे थई रह्युं छे ए निश्चय छे. भाई! अहीं तो तळिये-वस्तुना तळमां जाय तो पत्तो खाय एवुं छे. कोई ने एम लागे के आ तो निश्चयाभास छे. भगवान! तने स्वभावनी सत्तानी खबर नथी. भगवान आत्मानी ज्ञानसत्ता ज्ञानना होवापणे छे. एमां व्यवहारना जे विकल्प ऊठे ए संबंधीनुं ज्ञान थवुं ते ते काळे ज्ञाननी परिणतिना स्वभावथी थाय छे, पण रागने लीधे नहि. ते काळे स्वपरने जाणवानी परिणति पोताना अस्तित्वने लईने ऊभी थाय छे, पण रागने लईने नहि. भगवान आत्मानो स्व-परने प्रकाशवाना सामर्थ्यवाळो चैतन्यप्रकाश ज एवो छे के जेम अरीसामां सामेनी चीज-बिंबनुं प्रतिबिंब देखाय छे तेम ज्ञानमां रागादि कर्म-नोकर्म जे ज्ञेय छे ते प्रतिभासे छे. तेथी रागने काळे रागनुं जे ज्ञान थाय ए रागने लईने नहि पण ज्ञानना स्वपरप्रकाशक सामर्थ्यने लईने ए ज्ञान थाय छे. ज्यारे रागनुं ज्ञान रागने लईने नथी तो पछी रागथी (राग करतां करतां) आत्मानी निर्मळदशा केम प्रगट थाय? शुभराग-व्यवहार साधन (कारण) अने निर्मळदशा कार्य एम शी रीते थाय? न ज थाय.
प्रश्नः–व्यवहारने साधन कह्युं छे ने?
उत्तरः–ए तो बीजी रीते कह्युं छे. (निश्चय) साधननी जोडे बीजी चीज (व्यवहार) छे एने आरोप करीने साधन कह्युं छे, पण खरेखर ए साधन नथी. शुभराग-व्यवहार छे ए निश्चयने साधे छे, व्यवहारथी निश्चय थाय छे, व्यवहार जे राग छे एनाथी वीतरागता थाय छे, व्यवहार जे दुःख छे एनाथी सुख थाय छे’-एम नथी, भाई! (ए तो बधां व्यवहारनां कथन छे)
भाई! तारा ज्ञाननुं सामर्थ्य कोई अचिन्त्य छे. जे काळे जेवा रागादि (ज्ञेय) होय तेवुं ज ज्ञान थई जाय छे ए ज्ञाननी पर्यायनुं सामर्थ्य छे. तेम छतां आवो राग