Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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गाथा २०-२१-२२ ] [ ६९

हवे सवळुं ल्यो. अवळानी वात पहेलां करी. वळी अग्नि छे ते इंधन नथी ए द्रष्टांतथी प्रतिबुद्धनी वात करे छे.

वळी अग्नि छे ते लाकडुं (इंधन) नथी, अने इंधन छे ते अग्नि नथी. अग्नि - प्रकाशमान ज्योति ते लाकडुं नथी. लाकडुं छे ते प्रकाश नथी. समयसार, जयसेनाचार्यनी टीकामां अग्निना त्रण मुख्य गुणो वर्णव्या छे. पाचक, प्रकाशक अने दाहक. अग्नि अनाजने पकवे ए पाचक, अग्नि पोताने अने परने प्रकाशे ते प्रकाशक अने लाकडां आदिने बाळे ते दाहक. तेम भगवान आत्मामां त्रण मुख्य गुणो छे. पाचक-सम्यग्दर्शन पूर्णानंदने पचावे छे ते पाचक. एक समयनी सम्यग्दर्शननी पर्याय पूर्णानंदस्वरूपने पचावे छे. प्रकाशकः ज्ञान स्व अने परने जाणवानो प्रकाश करे छे ते प्रकाशक अने दाहकः वीतरागी चारित्र रागादिने बाळी मूके छे ते दाहक. ज्यां आत्मामां स्थिरता थई त्यां राग रहेतो नथी ए दाहक. आम अग्निना द्रष्टांते आत्मामां त्रण गुण कह्या.

वळी अग्नि छे ते इंधन नथी, इंधन छे ते अग्नि नथी. अग्नि छे ते अग्नि ज छे, इंधन छे ते इंधन ज छे. आ सामान्य वात करी. (हवे त्रण काळथी वात करे छे.) (वर्तमान) अग्निनुं इंधन नथी, इंधननो अग्नि नथी, -अग्निनो ज अग्नि छे, इंधननुं इंधन छे-ए वर्तमान थयुं. (भूतकाळ) अग्निनुं इंधन पहेलां हतुं नहि, इंधननो अग्नि पहेलां हतो नहि, -अग्निनो अग्नि पहेलां हतो, इंधननुं इंधन पहेलां हतुं-ए भूतकाळ थयो. (भविष्यकाळ) अग्निनुं इंधन भविष्यमां थशे नहि, इंधननो अग्नि भविष्यमां थशे नहि, -अग्निनो अग्नि ज भविष्यमां थशे, इंधननुं इंधन भविष्यमां थशे. आ प्रमाणे जेम कोईने अग्निमां ज सत्यार्थ अग्निनो विकल्प थाय ते प्रतिबुद्धनुं लक्षण छे.

तेवी ज रीते हुं आ परद्रव्य नथी, आ परद्रव्य मुजस्वरूप नथी, -हुं तो हुं ज छुं, परद्रव्य छे ते परद्रव्य ज छे. आ सामान्य वात करी, जुओ, आ हुं तो सर्वज्ञ- स्वरूपी प्रभु आत्मा छुं. हुं सर्वने जाणुं खरो, पण ए सर्व मारुं नहि. अहाहा! पर्यायमां स्वपरने पूर्ण जाणुं ए मारो स्वभाव छे, पण पर मारा छे एम वस्तुस्वरूप नथी. तथा पर हतां तो मारामां ज्ञान थयुं एम पण नथी. अहीं शुं कहे छे? के हुं आ परद्रव्य नथी. राग ए हुं नहि, शरीर ए हुं नहि, देश, कुटुंब, दीकरा-दीकरी ए हुं नहि. केटलाक माने छे ने के-मारी (पोतानी) हाजरी होय अने मारी (पोतानी) हूंफ मळे तो काम सारां थाय. धूळेय नथी. हुं (पोते) तो जाणनार ज्ञायक छुं. एमां वळी बीजाने हूंफ मळे ए कयांथी आव्युं? वळी आ परद्रव्य मारा स्वरूपे नथी. आ शरीर, मन, वाणी, राग ते मारुं स्वरूप नहि. हुं तो एक अस्ति सर्वज्ञस्वरूप ज छुं. लोकमां माणस होशियार होय तो वधारे रळे अने दुकाने डफोळ बेठो होय तो शुं रळे? एम नथी कहेता! जुओ, गामनी घणी दुकानो भांगी पडी अने हुं होशियार-जाणकार छुं