गाथा २३-२४-२प ] [ ८३ अनुभवे छे. अज्ञानीने जे पुण्य-पापना विकल्प ऊठे तेने वश ए थई गयो छे. तेथी ते स्वपरनी जुदाई न करतां बन्नेने एकरूप करे छे. एकेन्द्रिय अवस्थाथी मांडीने पंचेन्द्रिय द्रव्यलिंगी मुनिने जे शुभभाव थाय ते सघळा अस्वभावभाव छे. ते सर्व अस्वभावभावने ते पोताना छे एम माने छे.
प्रश्नः– केटलाक कहे छे ने के- ‘ए शुभभाव साधन छे अने निश्चय वस्तु साध्य छे?
उत्तरः– भाई, एम नथी. जो एम होय तो एनो अर्थ तो एम थयो के अचेतन राग साधन अने चैतन्यस्वभाव तेनुं साध्य. अथवा राग जे अजीव छे ते साधन अने एनाथी साध्य जीवस्वरूप (वीतरागता) प्रगटे छे. अथवा राग जे दुःखस्वरूप छे ते साधन अने तेनाथी आनंद प्रगटे ते साध्य. भाई, वस्तु बहु झीणी छे एटले खास ध्यान राखवुं जोईए. अहीं तो अंदरना उपयोगने अने रागने भिन्न पाडवो जोईए, पण अज्ञानी तेम करतो नथी एम कहे छे.
अहाहा! एकलो ज्ञायक-ज्ञायक-ज्ञायक सत्य प्रभु-एने अजाणक एवा जे रागादि अचेतन दुःखरूप भाव एनाथी भिन्न पाडी अनुभववो ए सूक्ष्म छे, कठण छे. पंडित राजमलजीए ए ज वात कळशटीकामां १८१ मां कळशमां कही छे. त्यां कह्युं छे के- “भावकर्म जे मोह-राग-द्वेषरूप-अशुद्ध चेतनारूप-परिणाम, ते अशुद्ध परिणाम वर्तमानमां जीवनी साथे एकपरिणमनरूप छे, तथा अशुद्ध परिणामनी साथे वर्तमानमां जीव व्याप्य-व्यापकरूप परिणमे छे, तेथी ते परिणामोना जीवथी भिन्नपणानो अनुभव कठण छे, तोपण सूक्ष्म संधिनो भेद पाडतां भिन्न प्रतीति थाय छे.”
अज्ञानी आनंदस्वरूप भगवान आत्माथी विरुद्ध रागादि दुःखरूप अस्वभावभावोने, भेद करवानी शक्ति तेने आथमी गई होवाथी मारापणे-एकपणे छे एम करतो थको पुद्गलद्रव्यने ते मारुं छे एम अनुभवे छे. अहीं जड पुद्गलने अनुभववानी वात नथी पण राग जे पुद्गलरूप छे तेने अनुभवे छे एम कहे छे. जीवने पोतानी विकारी दशा अनुभवमां आवे छे तेथी अहीं विकारने पुद्गल कही दीधा छे. भगवान चैतन्यदेवना आनंदनो अनुभव नहि, पण रागनो अनुभव छे तेने अहीं पुद्गलनो अनुभव कह्यो छे. आवी वात छे, भाई. एने कोई एम कहे के आ तो निश्चयनी एकली वात करे छे. पण आ निश्चय एटले साचुं ज आ छे. शुभ राग करतां करतां शुद्ध थाय, शुद्धनुं साधन शुभ ए तो बधां आरोपित कथन छे. भाई, निश्चयथी तो शुभराग अचेतन छे. गाथा ६ मां ए वात आवी गई छे के एक ज्ञायकभाव अनेकरूप शुभ-अशुभ भावोना जड स्वभावे परिणमतो नथी. जो ए परिणमे तो जीव जड थई जाय. चैतन्य उपयोग-स्वरूप भगवान आत्मा जो रागना स्वभावे परिणमे तो ते अचेतन जड थई जाय.