Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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८४ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-२

रागादि भाव ए पुद्गलनी जात छे, अचेतन छे, दुःखरूप छे. एने पोते आनंद-स्वरूपी चैतन्यभगवान होवा छतां पोतानो माने एनुं नाम मिथ्यात्व छे. एवा मिथ्यात्वी अप्रतिबुद्धने हवे समजाववामां आवे छे. जुओ कोई एम कहे के आ समयसार तो मुनिने माटे छे तो अहीं आचार्य कहे छे के एवा अप्रतिबुद्धने समजाववामां आवे छे.

प्रश्नः– अप्रतिबुद्ध मुनिने समजाववामां आव्युं छे एम कहो तो?

उत्तरः– अप्रतिबुद्ध मुनि होय ज नहि. जेने आत्मज्ञान नथी, आत्मनुभव नथी ते मुनि केवा?

अहीं ‘एवा अप्रतिबुद्ध’ एम लीधुं छे. एवो कोण अप्रतिबुद्ध छे? तो कहे छे के जेने कर्मनिमित्तना वशे जे अस्वभावभाव उत्पन्न थयो तेने पोताना माने छे एवा अप्रतिबुद्धने समजाववामां आवे छे केः-

‘हे दुरात्मन्! आत्मानो घात करनार! जुओ, ‘हे दुरात्मन्’ ए करुणानो शब्द छे हों. परंतु ‘हे आत्मन्’ एम न कहेतां ‘दुरात्मन्’ एम केम कह्युं? एम कही आचार्य एम समजावे छे के भाई! आनंदनो नाथ भगवान तुं ज्ञानस्वरूपे छे ने. तारुं सत्त्व तो ज्ञानसत्त्व छे, तारुं सत्त्व कांई पुण्य अने रागादि नथी. तुं अनंतवार जैननो साधु थयो अने नवमी ग्रैवेयक गयो. त्यां पण तुं रागथी लाभ माननारो, रागने पोतानुं स्वरूप माननारो हतो. रागथी भिन्न मानवानी तारी स्वरूपदशा हती ज नहि. अरेरे! तारी जात तो ज्ञानानंदस्वरूप चेतन छे. तेने भूलीने तें रागादि कजातने पोतानी मानी! आम जीवनी अनादिथी मिथ्यादशा छे ए बताववा ‘दुरात्मन्!’ एम संबोधन कर्युं छे. एमां आचार्यनी करुणा ज छे.

वळी ‘आत्मानो घात करनार! एम संबोधन कर्युं छे ने? त्यां एम कह्युं के-हे भाई! तें निज सच्चिदानंदस्वरूप भगवान आत्माने भूलीने दया, दान, व्रतादिना क्रियाकांडने पोतानुं स्वरूप मान्युं छे. पण ए सर्व क्रियाकांड रागस्वरूप होवाथी आत्मानो घात करनारा छे. दुःखदायक छे. आत्माना सुखनो नाश करवावाळा छे. भाई! जीवती जागती ज्योति उपयोगस्वभावे विराजे छे तेनो अनादर करी हुं राग छुं एम मानीने तें तारा आत्मस्वभावनो घात कर्यो छे, हिंसा करी छे. ‘हुं राग छुं’ एवी राग साथे एकपणानी मान्यता ज महा हिंसा छे एम दर्शाववा आचार्यदेवे ‘आत्मानो घात करनार! एम संबोधन कर्युं छे. अहाहा! आचार्यदेवनी शुं शैली छे! वस्तुनी वस्तु छे. कांई वस्तु अवस्तु थई नथी. पण वस्तुने न स्वीकारतां वस्तुमां जे नथी एवा विकल्पने-रागादिने स्वीकारवाथी वस्तुनो अनादर थयो. ते ज आत्मानी हिंसा छे. घात छे.

हवे आवी खबर न मळे अने कहे के अमे जीवोनी दया पाळीए, व्रत पाळीए अने भक्ति करीने मंदिरो बंधावीए अने तेमां मूर्तिओ स्थापीए इत्यादि. परंतु आ