Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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गाथा २३-२४-२प ] [ ८प शुं करे छे भगवान? ए परने कोण करी शके? एनी वात तो बहु दूर रहो, पण ए परना थवा काळे तने जे राग थाय ए राग ते हुं छुं अने ए राग लाभदायक छे एम जो तुं माने छे तो तुं आत्मघाती छे. चाहे लाखो मंदिर बंधावी करोडो रूपिया खर्च्या होय तोपण आ मिथ्या मान्यता वडे तुं आत्मघाती-महापापी छे.

हवे द्रष्टांत आपीने समजावे छेः-‘जेम परम अविवेकथी खानारा हस्ती आदि पशुओ सुंदर आहारने तृण सहित खाई जाय छे एवी रीते खावाना स्वभावने तुं छोड, छोड.’ जेम हाथीने चुरमुं (लाडवो आप्यो) आप्युं होय अने घासना पूळा आप्या होय तो पूळा अने चूरमुं भेगुं करीने खाय पण भेद पाडे नहि के आ चुरमुं छे अने आ घास छे. (आ मीठाशवाळुं चुरमुं छे अने मोळास्वादवाळुं आ घास छे एम स्वादना भेदथी बन्नेमां भेद पाडतो नथी.) तेम अज्ञानी जीव ज्ञानानंदस्वभावी आत्मानी बाजुमां (निकटमां) जे राग थाय छे एनाथी लाभ माने छे अने राग मारी चीज छे एम ए रागनो अनुभव करे छे. परंतु ज्ञानने (रागथी) जुदो पाडीने आनंदनो अनुभव करतो नथी. रागनो अनुभव तो दुःखनो-आकुळतानो अनुभव छे. तेथी अहीं कहे छे के तुं एवा रागना अनुभवने छोड. अंदर जे ज्ञानानंदस्वरूपी भगवान आत्मा विराजे छे तेनो अनुभव कर तो तने आनंदनो-सुखनो अनुभव थशे.

अहाहा! अमृतनो सागर भगवान अंदर ज्ञान अने आनंदथी छलोछल भरेलो छे. तेनो अनुभव छोडीने पर संयोगमां-स्त्रीना विषयमां, आबरूमां, धनदोलतमां, बाग-बंगलामां मने ठीक पडे छे, मझा पडे छे, मीठाश आवे छे एम जे माने छे ए तो आत्मघाती छे ज. अहीं तो अंदर जे शुभरागनो विकल्प ऊठे छे तेने पोतानो मानी एकमेकपणे अनुभवे छे, ए विकल्प ज हुं छुं अने एथी मने लाभ (धर्म) छे एम जे माने छे ते पण आत्मघाती छे, हिंसक छे, भले पछी ए जैन दिगंबर साधु होय, पंचमहाव्रत पाळतो होय, जंगलमां रहेतो होय अने हजारो राणीओ छोडी होय. भगवान! धर्म कोई जुदी चीज छे.

प्रश्नः– समकिती तो भोगवे ने?

उत्तरः– भाई, तने खबर नथी. समक्तिीने छन्नु हजार राणीओ, छ खंडनुं राज्य, चक्रवर्तीपणुं अने कोईने तीर्थंकरणपणुं पण होय पण एने ए भोगवतो नथी. समक्तिीने जे विकल्प आवे छे एने ते हळाहळ झेर माने छे. काळो नाग देखीने जेम थाय एम एने ए उपसर्ग माने छे, एमां एने रस के आनंद आवतो नथी. चक्रवर्ती होय ए मणिरत्नोजडित हीराना सिंहासन पर बेठो होय अने हजारो चमरबंधी राजाओ एने चामर ढोळता होय पण एमां कयांय एने आत्मानो आनंद भासतो नथी. हा, एने राग आवे छे, हजु आसक्ति (चारित्रमोहजनित) पण छे, पण एमां एने सुख