गाथा २३-२४-२प ] [ ८७ एवुं अचेतनपणुं चैतन्यने केम शोभे? (न ज शोभे.) शुं तुं माने तेथी तुं रागरूपे थई गयो के जेथी तुं आ पुद्गलद्रव्य मारुं छे एम अनुभवे छे?
पर्यायमां रागनो अनुभव ए तो पुद्गलनो अनुभव छे. अहीं पुद्गल एटले पेला जड (स्पर्श, रस, गंध, वर्णवाळा) नहि पण अणउपयोगस्वरूप दया, दान, व्रतादिना परिणाम जे पोताने के परने जाणता नथी तेथी जड, अचेतन छे एनी वात छे. ए रागादि परिणाम चैतन्यउपयोगस्वरूपथी भिन्न चीज छे. अहीं कहे छे के भगवाने तो तने उपयोगस्वरूपे जोयो छे तो हुं आ रागस्वरूपे छुं एवी जूठी मान्यता कयांथी लाव्यो? झीणी वात छे, बापु! संप्रदायमां तो आ व्रत पाळो अने दया करो एटले धर्म थई गयो एम कहे, पण भाई, मार्ग जुदो छे. वस्तु आत्मा द्रव्य- पर्यायस्वरूप छे. त्यां पर्याय ध्रुव उपयोगरूप नित्यानंदस्वभावने लक्ष करी न उपजे तो धर्म केवी रीते थाय? वर्तमान पर्याये उपयोगमां दया, दान, व्रतादिना रागने लक्षमां लई अने ए राग ते मारुं अस्तित्व एम मान्युं तो ए तो पुद्गलनो अनुभव थयो. भगवान आत्मानो अनुभव तो रही गयो.
हवे कहे छेः-‘जे नित्य-उपयोगस्वभावरूप जीवद्रव्य ते केवी रीते पुद्गलद्रव्यरूप थई गयुं के जेथी तुं आ पुद्गलद्रव्य मारुं छे एम अनुभवे छे? कारण के जो कोईपण प्रकारे जीवद्रव्य पुद्गलद्रव्यरूप थाय अने पुद्गलद्रव्य जीवद्रव्यरूप थाय तो ज “मीठानुं पाणी” एवा अनुभवनी जेम “मारुं आ पुद्गलद्रव्य” एवी अनुभूति खरेखर व्याजबी छे; पण एम तो कोई रीते बनतुं नथी.’
शुं कहे छे? मीठुं (लवण) वरसादमां ओगळी जाय अने बीजी मोसममां ए पाणीथी भिन्न थईने मीठुं (लवण) थई जाय. हवे मीठुं द्रवतां जेम मीठानुं पाणी अनुभवाय छे तेम तुं आनंदनो नाथ चैतन्यस्वरूप ज्ञानरसकंद भगवान आत्मा द्रवीने- ओगळीने रागरूपे थई गयो शुं? (ना) जेम मीठुं द्रवीने पाणी थाय एम भगवान उपयोगस्वरूप आत्मा पोताना उपयोगनी सत्ता छोडीने अण-उपयोगरूप एवा रागरूपे थाय तो ‘मारुं आ पुद्गलद्रव्य’ एवी तारी अनुभूति व्याजबी गणाय. दया, दान, व्रतादिनो के गुण-गुणीना भेदरूप विकल्पनो इत्यादि जे राग ए हुं छुं एवो तारो अनुभव त्यारे ज व्याजबी गणाय के भगवान आत्मा पोतानो त्रिकाळ ज्ञानानंदस्वभाव छोडीने रागरूपे थई जाय. पण एम तो कोई रीते बनतुं नथी. भगवान आत्मा तो कायम अखंड एकरूप ज्ञायकभावस्वरूपे अनादिअनंत रहेलो छे; अने राग रागपणे भिन्न ज रहे छे.
हवे ‘एम तो कोई रीते बनतुं नथी’ ए वात द्रष्टांतथी स्पष्ट करवामां आवे छेः-‘जेम खारापणुं जेनुं लक्षण छे एवुं लवण पाणीरूप थतुं देखाय छे अने द्रवत्व (प्रवाहीपणुं) जेनुं लक्षण छे एवुं पाणी लवणरूप थतुं देखाय छे कारण के खारापणुं