Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 376 of 4199

 

गाथा २३-२४-२प ] [ ९प परद्रव्यने एकपणे मानवुं छोडी दे. आ पहेली वात के आत्मा शरीर अने रागादिथी भिन्न छे ए एने आकरी पडे छे. एटले शुभभाव करतां करतां सारी पदवी मळशे अने पछी मोक्ष थशे एम विचारे छे. पण धूळेय नहि मळे (ऊंचां पुण्य नहि बंधाय), सांभळने अज्ञानीने पदवी केवी?

प्रश्नः– पहेलां भूमिका तैयार करवी पडे ने?

उत्तरः– पहेलां रागथी भिन्न पडे ए भूमिका छे. आ आत्मा ज्ञानप्रकाशना नूरनुं पूर छे एवी एने खबर ज कयां छे? ए जोवानी एने दरकारेय कयां छे? पछी भूमिका शामां तैयार करशे? अरेरे! हा हो अने हरिफाई-रळवुं, खावुं-पीवुं, कुटुंब आदि भोगववुं, मरवुं अने चार गतिमां रखडवुं इत्यादि सिवाय एने बीजुं विचारवानी नवराश ज कयां छे?

भाई! तारुं स्वरूप तो त्रिकाळी ज्ञाता-द्रष्टा छे. ए स्वरूपना भान विना पुण्यभावना विकल्पोथी धर्म थाय एम तुं माने छे पण ए मिथ्यादर्शन छे. एम के पुण्य तो करीए ने? पण भाई! एने एना क्रममां शुभभाव आव्या विना रहेशे नहि. क्रममां एने शुद्धता नहि थाय, अने ज्ञानीने पूर्ण शुद्धता नहि होय त्यांसुधी शुभभाव आवशे, व्यवहार आवशे. पण ए हेय छे. आवुं वस्तुस्वरूप छे, भाई. शुं थाय? तेथी कहे छे के ‘वृथा मान्यताथी बस थाओ.’ राग ए हुं एवी राग साथे एकपणानी वृथा मान्यता छोडी दे. अने आ चैतन्यस्वरूप आत्मा ते हुं एम स्वरूपनो अनुभव कर.

हवे आ ज अर्थना कळशरूप काव्य कहे छेः-

* कळश २३ः श्लोकार्थ उपरनुं प्रवचन *

अयि ए कोमळ संबोधनना अर्थवाळुं अव्यय छे. आचार्य कोमळ संबोधनथी कहे छे के हे भाई! कथम् अपि मृत्वा तुं कोई पण रीते महा कष्टे अथवा मरीने पण तत्त्वकौतुहली मन् तत्त्वनो कौतुहली थई भवमूर्तेः पार्श्ववर्ती मुहूर्तम् आ शरीरादि मूर्तद्रव्योनो एक मुहूर्त (बे घडी) पाडोशी थई अनुभव आत्मानो अनुभव कर. जुओ, कहे छे के भगवान! तुं आनंदनो नाथ छे तेने राग अने शरीरथी भिन्न पाडीने जो. तारुं चिदानंद स्वरूप अनादिअनंत एवुं ने एवुं विराजे छे तेने महाकष्टे एटले कष्ट करीने एम नहि पण महान पुरुषार्थ करीने, मरीने पण एटले मरणनी चिंता (परवा) कर्या विना तुं तत्त्वनो कौतुहली था.

अहाहा! आ ‘आत्मा, आत्मा’ एम कर्या करे छे ए चीज छे शुं? कोई दिवस जोई नथी ए चीज शुं छे? एक वार कौतुहल तो कर. नवी चीज जोवानुं कौतुहल करे छे ने? एम एने जोवानुं एक वार तो कौतुहल कर. घणा वर्षनी वात छे. एक राणी हती. ए ओझलमां (पडदामां) रहेती. ज्यारे बहार नीकळे त्यारे लोको कुतूहलथी