Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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परिशिष्टः ३७३

आ रीते समस्त वस्तुओ स्वरूपमां प्रवृत्ति ने पररूपथी व्यावृत्ति वडे बन्ने भावोथी अध्यासित छे, अर्थात् बन्ने भावो वस्तुमां रहेला छे. जेमके - आ एक आंगळी पोतापणे छे ने ते बीजी आंगळीपणे नथी. आ रीते ते पोतामां प्रवृत्तिपणे अने बीजी आंगळीथी व्यावृत्तिपणे छे. आवुं ज वस्तुनुं सहज स्वरूप होवाथी शरीर आम रहे, ने आंखो आम बंध करीए तो ध्यान थाय एवी मान्यता बराबर नथी, केमके शरीरनी अवस्था ने आंखो बधुं पर छे. आंखोनुं खुल्लुं रहेवुं के बंध रहेवुं ने शरीरनी अमुक अवस्था रहेवी ए बधुं भगवान आत्मामां छे ज नहि.

अहा! आ चैतन्यदेवनी लीला तो जुओ, जाणनारो जाणगस्वभावी प्रभु पोते ज ज्ञान छे, ने पोते ज ज्ञेय पण छे. प्रमाण पण पोते ने प्रमेय पण पोते ज छे. द्वैतने निषेधवुं अशक्य छे एम कह्युं ने! पोते जाणवाना भावपणे प्रमाण छे, अने पोते पोतामां जणावाना भावपणे प्रमेय पण छे. आम एक ज्ञान-प्रमाणमां द्वैत छे, भेद छे.

भाई! आ एक वात यथार्थ समजे तो निमित्तथी थाय ने व्यवहारथी थाय, ने क्रमबद्ध न थाय इत्यादि बधी तकरारो मटी जाय. केटलाक कहे छे के-होनहार (जे काळे जे थवानुं होय ते काळे ते ज थाय) एम कहीने तमे बधुं नियत कहेवा मागो छो, तेने कहीए छीए के-हा भाई! ए सम्यक् नियत ज छे. जे समये वस्तुनो जे पर्याय स्वकाळे प्रवर्तीत छे ते परने लईने तो नहि पण बीजी पर्याय जे बीजे समये थवानी होय के थई होय ते पर्यायने लईने पण नहि. ते पर्याय ते समये नियत ज छे. वस्तु जे वर्तमान-वर्तमान परिणमे छे ते पोतानी पर्यायथी स्वतंत्र ज परिणमे छे. आवी ज वस्तुस्थिति छे त्यां शुं थाय?

अत्यार सुधी टुंकामां जे कहेवायुं तेनो हवे विस्तार करे छेः- ‘त्यां, ज्यारे आ ज्ञानमात्र भाव (-आत्मा), शेष (बाकीना) भावो साथे निज रसना भारथी प्रवर्तेला ज्ञाता-ज्ञेयना संबंधने लीधे अने अनादि काळथी ज्ञेयोना परिणमनने लीधे ज्ञानतत्त्वने पररूपे मानीने (अर्थात् ज्ञेयरूपे अंगीकार करीने) अज्ञानी थयो थको नाश पामे छे, त्यारे (ते ज्ञानमात्र भावनुं) स्व-रूपथी (-ज्ञानरूपथी) तत्पणुं प्रकाशीने (अर्थात् ज्ञान ज्ञानपणे ज छे एम प्रगट करीने), ज्ञातापणे परिणमनने लीधे ज्ञानी करतो थको अनेकान्त ज (स्याद्वाद ज) तेने उद्धारे छे-नाश थवा देतो नथी.’

शुं कीधुं आ? के आ आत्मा पोतानाथी अन्य पदार्थो साथे निज रसथी प्रवर्तेला ज्ञाता-ज्ञेयना संबंधने लीधे-पोते ज्ञाता छे ने बीजा पदार्थो ज्ञेय छे एवा सहज संबंधने लीधे -अनादिकाळथी ज्ञेयोना परिणमनथी पोतानुं (ज्ञाननुं) परिणमन छे एम मानी बेठो छे. ज्ञानमां ज्ञेय जणातां ज्ञेयने लईने मारुं परिणमन छे एम ते