Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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परिशिष्टः ३९१

असत्पणुं मानीने-अंगीकार करीने नाश पामे छे, त्यारे (ते ज्ञानमात्र भावनुं) स्वकाळथी (-ज्ञानना काळथी) सत्पणुं प्रकाशतो थको अनेकान्त ज तेने जिवाडे छे-नाश पामवा देतो नथी.’

जुओ, शुं कहे छे? भगवान आत्मा ज्ञानानंदस्वरूपी प्रभु छे. एना ज्ञानना परिणमनमां परकाळनुं-परद्रव्यनुं परिणमन जणातां ए परिणमन हुं छुं. वा एने लईने हुं छुं-मारुं परिणमन छे-एम मानी अज्ञानी पोतानो नाश करे छे- अरे भाई! स्वकाळे पोतानी ज्ञाननी पर्याय परने अने पोताने जाणवारूपे थाय ए तो एनुं स्वरूप छे. पण अरे! एम न मानतां परिणमता परद्रव्यनी पर्यायथी मारी पर्याय थई अने नाश थतां मारी पर्याय नाश पामी गई एम मानीने अज्ञानी जीवो पोताना स्वकाळनो अभाव- नाश करे छे. परकाळथी-परद्रव्यनी अवस्थाथी पोतानुं अस्तिपणुं माननारा पोताना स्वकाळनो नाश करे छे.

जुओ, आ आत्मानी अपेक्षाए परद्रव्यनी-निमित्तनी पर्याय परकाळ छे. भले एनी अपेक्षा ते स्वकाळ हो, आ जीवनी अपेक्षा ते परकाळ छे. स्वकाळमां परकाळनो अभाव छे. छतां निमित्तने- परद्रव्यने लईने मारी अवस्था-स्वकाळनी परिणति-थई एम माने ते पोताना स्वकाळनो नाश करे छे.

हा, पण आ पंचमकाळने लईने अहीं केवळज्ञान थतुं नथी ने? एम नथी बापु! पंचमकाळने लईने केवळज्ञान थतुं नथी, ने चोथा काळने लईने थाय एम तुं माने ए तो नर्युं मूढपणुं छे, केमके परकाळनी तारा स्वकाळमां नास्ति छे. अरे भाई! चोथा काळमां पण तुं हतो के नहि? पण परकाळ तने शुं करे? परकाळथी पोताने लाभ माने ए पोताना स्वकाळनो नाश करे छे अर्थात् ए मिथ्याद्रष्टि ज रहे छे. आ चक्षु अने चश्मां छे तो ज्ञान थाय छे एम माननारा बधा परकाळने पोतानो माने छे. आ आत्मानी अपेक्षा चक्षु ने चश्मां परकाळ छे भाई! छतां एनाथी पोताने ज्ञान थवानुं माने ए तो मिथ्यादर्शननो ज प्रभाव छे.

प्रश्नः– पण चश्मां होय तो ज देखाय छे ने? वंचाय छे ने? उत्तरः– एम नथी भाई! वंचाय, न वंचाय ए तो ते ते काळे एनी स्वकाळनी दशा छे, ने बाह्य पदार्थ चश्मां आदि (होवां, न होवां) तो निमित्तमात्र छे. जुओ, ते काळे वंचातुं नथी एवुं ज्ञान पोताथी थयुं छे के (चश्मां आदि) परथी? नथी वंचातुं एवुं ज्ञान स्वकाळथी पोताथी ज थयुं छे. परने लईने स्वमां कांई थाय ए मान्यता महान भ्रम छे, भाई!

अहीं कहे छे -ज्यारे ज्ञानमात्र भाव पूर्वे जेमनुं आलंबन कर्युं हतुं ते ज्ञेय पदार्थोना विनाशकाळे ज्ञाननुं असत्पणुं मानीने अर्थात् परकाळ पलटातां मारो नाश