Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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३९२ः प्रवचन रत्नाकर भाग-१० थई गयो एम मानीने पोतानो नाश करे छे, त्यारे स्वकाळथी सत्पणुं प्रकाशतो थको एटले के समये समये जे ज्ञाननी दशा प्रगट थाय ते स्वकाळथी सत् छे एम प्रकाशतो थको अनेकान्त ज तेने जिवाडे छे-नाश थवा देतो नथी. अहा! स्वकाळथी हुं सत् छुं, परकाळथी नहि एम प्रकाशतो अनेकान्त ज एने जिवाडे छे भाई! आत्मामां निर्मळ ज्ञान-श्रद्धान-शान्तिनी जे दशा थाय छे ते पोताथी ज थाय छे, निमित्तने लईने थाय छे एम कदी नथी.

अरे! एक तो माणसो शास्त्र-स्वाध्याय करता नथी, अने कोई करे छे तो पोतानी मति-कल्पनाथी शास्त्रोनां अर्थ करे छे, पण शास्त्रनो अभिप्राय शुं छे ते प्रत्ये पोताना ज्ञानने दोरी जता नथी! अहा! तेने शास्त्र शुं (गुण) करे?

तो देव-गुरु-शास्त्रना सत्संगमां रहेवुं एम उपदेश आवे छे ने? हा, आवे छे. पण ए तो निमित्तथी कथन छे बापु! धर्मी-ज्ञानी जीवने संग करवानो भाव-विकल्प होय छे त्यारे बहारमां ए चीज निमित्तपणे होय छे एम त्यां ज्ञान कराववुं छे, बाकी जे जे पर्याय थाय ते तेनो स्वकाळ छे, परने लईने -देव-गुरु- शास्त्रने लईने थाय छे एम छे नहि.

हा, पण समयसार वांचे तो समयसारनुं ज्ञान थाय ने पद्मपुराण वांचे तो पद्मपुराणनुं ज्ञान थाय -एम छे के नहि?

ना, एम नथी भाई! अहीं एनी ना पाडे छे; केमके शास्त्रना शब्दो वडे अहीं ज्ञाननी दशा थाय छे एम छे नहि. पोतानी समयसमयनी पर्याय एना (पोताना) स्वकाळने लईने थाय छे, परकाळने लईने नहि. ए ज कहे छे के-स्वकाळथी मारुं होवापणुं छे, परकाळथी नहि-एम जाणतो धर्मी अनेकान्त वडे पोताने जिवाडे छे अर्थात् पोतानो नाश थवा देतो नथी.

आत्मानी समयसमयनी ज्ञाननी अवस्था पोतपोतानी योग्यता अनुसार आत्मामां थाय छे, निमित्तने कारणे थाय छे एम नहि. निमित्त हो भले, अने एने जाणे पण, परंतु निमित्तने जाणनारी ज्ञाननी दशा पोतानी पोताथी छे, निमित्तने लईने नथी. झीणी वात छे भाई! जेवुं निमित्त होय तेवुं थाय एम ओला (-बीजा) कहे छे ने? तो कहे छे- एम नथी. आत्माना अनंतगुणनी अवस्था पोताना स्वकाळे पोतामां पोताथी थाय छे, निमित्तथी नहि. छतां लक्ष निमित्त पर होवाथी निमित्तने लईने मारी पर्याय थाय छे एम अज्ञानी माने छे- अज्ञानी पोताना सत्ने असत् करे छे.

आ काने शब्दो पडे छे ने? एनुं जे ज्ञान थाय छे ते ज्ञाननी पर्यायनो वर्तमान स्वकाळ छे; पोताने लईने ते पर्याय थाय छे, वाणी-शब्दोने लईने नहि. वाणी बंध थतां ए जातनुं ज्ञान बंध थयुं एटले वाणीने लईने मारामां ज्ञान थतुं हतुं ते