१७६ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-३ छे एनी ९३ प्रकृति छे. एमां एक एवी प्रकृति छे के जे पर्याप्तादिने उपजावे छे. ए जीवने उपजावे छे एम नथी. पंचास्तिकायमां आवे छे के छ काय ते जीव नथी, परंतु एमां जे ज्ञानमात्र स्वरूप छे ते जीव छे. अहीं कहे छे के छ कायना शरीरनी उत्पत्ति ए कार्य छे अने ए, करण एवा पुद्गलथी थयुं छे. पर्याप्त-अपर्याप्त आदि जीवस्थानना भेदनी उत्पत्तिरूप कार्य करण एवा पुद्गलथी थयुं छे. बेसवुं भारे कठण पण भाई! भगवान आत्मा तो ज्ञानघन चैतन्यबिंब प्रभु छे. एमांथी आ पर्याप्त-अपर्याप्त आदि भेद कयांथी रचाय?
प्रश्नः– आ शरीर सारुं होय तो धर्म थाय ने? कह्युं छे ने के ‘शरीरमाद्यम् खलु धर्मसाधनम्। ’
उत्तरः– धूळेय थतुं नथी, सांभळने भाई! आ शरीर तो जड-माटी-धूळ अजीव छे. एनाथी वळी तारामां शुं काम थाय? जड अचेतनथी वळी चेतनमां शुं कार्य थाय? अहीं एम कहेवुं छे के जीवना जे पर्याप्त, अपर्याप्त, सूक्ष्म, बादर, इत्यादि जे भेद पडे छे ते नामकर्मनी प्रकृतिने लईने छे अने ते कर्मनुं कार्य छे, आत्मानुं नहि. बहु सूक्ष्म वात, भाई.
भगवान! तुं कोण छो अने तारामां शुं कार्य थाय छे एनी तने खबर नथी. बहारनी मोटप आडे तने भगवान आत्मानी मोटप भासती नथी. अनुकूळ संयोगो मळतां, बहारनी मोटपनी तने अधिक्ता आवी गई छे. परंतु भाई, एथी तुं दुःखी थईने मरी रह्यो छे. बधाय भेदथी अने रागथी अधिक नाम जुदो भगवान आत्मा चैतन्यस्वरूप महाप्रभु छे. तेनुं माहात्म्य तने केम आवतुं नथी? भाई! परनो महिमा मटाडीने अनंत महिमावंत निज स्वरूपनो महिमा कर. दया, दान, व्रत, तप, इत्यादि शुभभाव करे त्यां तो तने एम थई जाय के में घणुं कर्युं, मने धर्म थई गयो. परंतु जराय धर्म थयो नथी. बापु! जरा सांभळ. आ पैसा, मकान, आदि जड तो कयांय गया, पण ए पैसाने रळवानो अने राखवानो जे पापभाव थाय छे ए पापभाव पण तुं नथी. अरे, तेने दानमां खर्चवानो जे शुभभाव-रागनी मंदतानो भाव थाय छे ते भाव पण तुं नथी. ए राग तारो नहि अने तुं ए रागनो नहि. ए राग पुद्गलनुं कार्य छे, अने पुद्गल एनुं कारण छे.
अहाहा! जैन परमेश्वर एम कहे छे के करण अने कर्म अर्थात् कारण अने कार्य बन्ने एक जातना अभिन्न होय छे. जेम सोनुं कारण छे अने पानुं थवुं ए एनुं कार्य छे, सोनीनुं ए कार्य नथी; तेम राग छे ए पुद्गलनुं कार्य छे, जीवनुं नहि. रागनुं कारण पुद्गल छे, चैतन्यमय जीव नहि. जगतथी तद्न जुदी वात छे! भगवान! आ जे सोनाना अक्षरो छे एनुं कारण सोनुं छे अने जे अक्षरो थया छे ए सोनानुं कार्य छे,