Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 695 of 4199

 

समयसार गाथा-६प-६६ ] [ १७७ सोनीनुं के कारीगरनुं ए कार्य नथी. सर्वज्ञ प्रभुनो मार्ग बहु झीणो छे, भाई! अहीं तो सर्वज्ञदेव एम कहे छे के प्रभु! तुं सर्वज्ञस्वभावी आत्मा छो ने! ए सर्वज्ञस्वभावी आत्मा शुं कार्य करे? मात्र ज्ञाननुं कार्य करे. सर्वज्ञस्वभाव कारण थईने वर्तमान जाणवा-देखवाना भाव करे ए जीवनुं-चैतन्यनुं कार्य छे. दया, दान, भक्ति, आदि राग छे ए तो अजीव छे, एमां चैतन्यनो अंश नथी. माटे ए पुद्गलनुं कार्य छे, चैतन्यमय जीवनुं नहि. परमात्माए जीव- अजीवनुं आवुं स्वरूप कह्युं छे.

भाई! तुं परनुं कांई करी शक्तो नथी. मात्र राग करे छे अने ए रागनुं कार्य पोतानुं-चैतन्यनुं छे एम माने छे. परंतु जे रागनुं कार्य चैतन्यनुं छे एम माने छे ते मूढ, मिथ्याद्रष्टि छे. चार गतिमां रखडनारो छे.

प्रश्नः– कोईनुं कांईक सारुं-भलुं करवुं एम तो कहो?

उत्तरः– भाई! सारुं-भलुं कोने कहेवाय? भगवान तो, सर्वज्ञस्वभावी आत्मामां निर्मळ श्रद्धा-ज्ञान-शांति (चारित्र)ना वीतराग परिणाम थाय एने सारुं कहे छे. वीतरागस्वरूप, अकषायस्वरूप जिनस्वरूप भगवान आत्मा छे. तेनी पर्यायमां अकषायी परिणाम थाय ए आत्मानुं कार्य छे, आत्मानुं भलुं ए कार्य अने एनुं कारण पोते ज छे, अन्य नहि. अज्ञानी भक्ति आदिनो भाव जेने अहीं जड पुद्गलमय कह्यो छे तेने पोतानुं कार्य माने छे. परंतु ए मान्यता मिथ्यादर्शन छे अने एथी ते पोतानुं बुरुं ज करे छे.

आचार्यदेवे शुं सरस दाखलो आपीने वात करी छे! सोनुं कारण अने तेनुं पानुं थयुं ते तेनुं कार्य. कारण के सोनुं (वस्तु) स्वतंत्र छे. माटे सोनुं ज पलटीने-बदलीने पानुं थयुं छे. कांई सोनी बदलीने पानुं थाय? (ना). तेवी ज रीते जे चोखा रंधाय छे ते चोखा कारण छे अने रंधावुं कार्य ते चोखानुं छे. चोखो जे चढे छे ते चढवाना कार्यनो र्क्ता चोखो ज छे. ते कार्य पाणी, स्त्री, के अग्नि आदि बीजी चीजनुं नथी केमके करण अने कार्य बन्ने अभिन्न होय छे. चोखा चढवानुं कार्य पाणी के स्त्री करे छे एम त्रणकाळमां नथी. भाई! वीतरागनी वाणी लोकोने आश्चर्य पमाडे एवी छे.

छ कायनी हुं दया पाळी शकुं छुं एम माननार, हुं र्क्ता अने जडनुं कार्य ए मारुं कर्म छे एम मानतो होवाथी अज्ञानी छे. पण ते कार्यना काळे, हुं भगवान आत्मा ज्ञानस्वरूप छुं एवी जेने द्रष्टि थई छे तेवा ज्ञानीने जाणवानी दशा थाय छे. अने ते जाणवानी दशा ए ज्ञानीनुं कार्य (कर्म) छे. परंतु दयानो भाव के जडनी क्रिया ज्ञानीनुं कार्य नथी. भाई! वस्तुनी स्थिति ज आवी छे. एमां कांई पंडिताई काम करे एम नथी.