२२६ ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-३ चकचकाट प्रकाशी रह्युं छे. जेम सूर्य जाज्वल्यमान प्रकाशे छे तेम आ भगवान आत्मा चैतन्यना प्रकाश वडे अतिशयपणे चकचकाट प्रकाशी रह्यो छे.
प्रश्नः– तो ए देखातो तो नथी?
उत्तरः– भाई! रागना अंधारामां ए तने देखातो नथी. रागनां अंधारां तो अचेतन छे. दया, दान, व्रत, भक्ति-इत्यादि जे राग छे ए तो अंधारुं छे. ए अंधारामां चैतन्य केम देखाय? अचेतनमां चैतन्य केम जणाय? ए तो चकचकाट ज्ञानस्वभावनी वीतरागी परिणति द्वारा जणाय छे. अने त्यारे व्यवहार-रागनुं पण ज्ञान थाय छे. आवो वीतरागनो मार्ग यथार्थ समज्या विना लोको बिचारा कंईकनुं कंईक मानीने, कंईकनुं कंईक करीने जीवन अफळ करीने संसारमां-अनंतकाळनी रखडपट्टीमां चाल्या जाय छे!
चकचकाट प्रकाशी रह्युं छे ए चैतन्य ‘स्वयं जीवः’ स्वयं जीव छे. जेम रंग-राग अने भेदने पुद्गल सिद्ध कर्या तेम अतिशय चकचकाट प्रकाशी रहेलुं आ चैतन्य छे ते स्वयं जीव छे एम सिद्ध करे छे. एकलो चैतन्यस्वभाव अहीं सिद्ध नथी करवो, जीव सिद्ध करवो छे. एटले कहे छे के अनादि, अनंत, चळाचळतारहित, स्वसंवेद्य, प्रगट अने बहु ऊंचेथी अत्यंतपणे चकचकाट प्रकाशी रहेली आ चैतन्यस्वभावमय वस्तु छे ते स्वयं जीव छे. लोको तो चाले ते त्रसजीव अने स्थिर रहे ते स्थावर जीव एम माने छे. अरे भगवान! जीवनी ए व्याख्या ज खोटी छे. प्रभु! तुं त्रसेय नथी अने स्थावरेय नथी. तुं रागीय नथी अने द्वेषीय नथी. तुं पुण्यवाळो के पापवाळो, कर्मवाळो के शरीरवाळो ए कांई तुं नथी. तो तुं छो कोण? प्रभु! के हुं तो चैतन्यस्वभावी जीव छुं आम ज्यारे अंदर प्रतीतिमां आवे अने ज्ञानमां जणाय त्यारे जीवने यथार्थ मान्यो अने जाण्यो कहेवाय. नवतत्त्वमां भिन्नपणे रहेला आत्माने त्यारे जाण्यो कहेवाय.
नवतत्त्वमां अजीव तत्त्व तो भिन्न छे. पुण्य, पाप, आस्रव अने बंध तत्त्व पण भिन्न छे. ज्यारे जीव बीजा तत्त्वोथी भिन्न छे तो ते केवो छे? के ए तो चैतन्यस्वभावमय स्वयं जीव छे. आ (शुद्ध जीव) सम्यग्दर्शननो विषय छे. आवो चैतन्यस्वभावी जीव ज्यारे स्वसंवेदन ज्ञानमां जणाय त्यारे रागादि भावो व्यवहारे जाणेला प्रयोजनवान छे-जे वात बारमी गाथामां लीधेली छे.
आ अतिशयपणे चकचकाट प्रकाशमान वस्तु स्वयं जीव छे, जाणे जगतनो सूर्य. स्वयं प्रकाशे अने बीजी चीजने पण ‘छे’ एम प्रकाशे छे. धर्मास्ति, अधर्मास्ति ईत्यादि ‘छे’,रागादि ‘छे’-एम सर्वने छेपणे आ भगवान चैतन्यस्वभाव जाणे छे. भगवान आत्मा जेने जणायो छे ते जाणे छे के आ बीजी चीज छे. परंतु ते अन्य सर्वने परज्ञेय तरीके जाणे छे. रागादिने पण परज्ञेय तरीके जाणे छे.