Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा-६८ ] [ २४९ (अर्थात् सर्वद्रव्योनां) परिणामना उत्पादक छे ज नहि.’ अहाहा! निमित्त जे परद्रव्य छे ते स्वद्रव्यना परिणामनो उत्पादक छे ज नहि-आ निर्णय राखीने निमित्तनुं ज्ञान कराव्युं छे. आवो निर्णय जे काळे थाय छे ते काळे बाकी रहेला रागने व्यवहार कहे छे. हवे आमां व्यवहारथी निश्चय थाय ए कयां रह्युं? बापु! निश्चयमोक्षमार्ग अने व्यवहारमोक्षमार्ग एक ज काळे साथे होय छे त्यां ते व्यवहार शुं करे? अने ए ज रीते निमित्तथी उपादानमां कार्य थाय छे ए वात पण त्रणकाळमां सत्य नथी.

प्रश्नः– परंतु निमित्त मददरूप-सहायरूप तो थाय ने?

उत्तरः– भाई! मददरूप थाय एनो अर्थ शुं? टेको आपे. टेको एटले शुं? आत्मा ज्यारे गतिरूप परिणमे छे त्यारे धर्मास्तिकाय निमित्त छे. धर्मास्तिकाय तो एम ने एम ज छे, तो तेणे शुं कर्युं? परंतु निमित्तथी एम कहेवाय छे के तेने लीधे गति थई. परंतु तेथी शुं धर्मास्तिकाय छे माटे जीव गतिरूपे परिणमे छे एम छे? जो एम होय तो धर्मास्तिकाय तो सदाय छे, तेथी जीवमां सदाय गति थवी जोईए. परंतु एम तो बनतुं नथी. जीव ज्यारे गति करवाना परिणामने पोते उत्पन्न करे त्यारे धर्मास्तिकायने निमित्तनो आरोप आपवामां आवे छे. अर्थात् कोईनी पर्याय कोई अन्य द्रव्यथी थती नथी.

काळलब्धि एटले शुं? दरेक द्रव्यनी समये समये जे पर्याय थाय छे ते स्वकाळे थाय छे अने ते एनी काळलब्धि छे. त्यारे निमित्त हो भले, परंतु निमित्ते पर्याय उत्पन्न करी छे एम नथी. तेवी रीते व्यवहारथी निश्चय उत्पन्न थाय छे एम पण नथी. व्यवहार तो निमित्त छे, अने निमित्त जेम परमां कांई उत्पन्न करतुं नथी तेम व्यवहार निश्चयने उत्पन्न करतो नथी सत्य तो आ ज छे. तेने मचडतां के कचडतां सत्य हाथ नहि आवे, भाई!

अहा! अहीं तो कहे छे के कुंभार घडानो उत्पादक छे ज नहि. तेवी ज रीते चोखा जे पाके छे तेने पाणी पकावे छे एम त्रणकाळमां नथी. जे द्रव्यनी जे पर्याय जे काळे थाय छे ते पर्यायनो र्क्ता ते द्रव्य छे. द्रव्य पोते र्क्ता थईने पर्यायना कार्यने करे छे, तेमां बीजानो जराय अधिकार नथी. बीजां शास्त्रोमां ज्यां बे कारणथी कार्य थाय छे एम कह्युं छे ए तो निमित्तनुं ज्ञान कराववा कह्युं छे. निश्चयथी कार्य तो उपादानथी ज थाय छे. आ निश्चयने राखीने प्रमाणज्ञान कराव्युं छे के बे कारणथी कार्य थाय छे. उपादानथी कार्य थाय छे-ए निश्चयने राखीने जे बीजी चीज-निमित्त छे तेनुं ज्ञान कराव्युं छे. व्यवहारथी-निमित्तथी कार्य थाय छे एम कह्युं होय एनो अर्थ ज ए छे के तेनाथी कांई थतुं नथी.

निश्चय मोक्षमार्ग थाय त्यारे व्यवहार साथे होय छे. निश्चयनी साथे जे कषायनी