Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा ६९-७० ] [

बंधाय छे एम कहेवुं ए तो निमित्तनुं कथन छे. आ प्रमाणे वस्तुस्वरूप जेम छे तेम यथार्थ समजवुं जोईए.

आत्मा त्रिकाळ एकरूप चैतन्यस्वभावमय भगवान छे. ते शुं करे? शुं ते रागादि विकार करे? शुं ते ज्ञानावरणादि कर्म करे? अहाहा....! ज्ञानानंदस्वरूपी सर्वज्ञस्वभावी भगवान आत्मा रागादि विकार करे के ज्ञानावरणादि जड कर्म करे ए वात जूठी छे. मात्र जाणवुं, जाणवुं, जाणवुं ए ज जेनो स्वभाव छे ते रागादि परने जाणे ए तो ठीक छे पण ते रागादि परने करे ए मान्यता विपरीत छे, अज्ञान छे. भाई! आ दया, दान आदि जे भाव थाय तेनो हुं कर्ता अने दया, दान आदि भाव ते मारुं कर्म तथा ते समये जे पुण्यकर्म बंधाय ते पण मारुं कर्म एवी मान्यता ते अज्ञान छे.

आ कर्ताकर्मविभावने-अज्ञानने मेटीने जे ज्ञाताभावे एक ज्ञायकना लक्षे परिणमे ते कर्मनो नाश करीने शिवमां वसे छे. शिवमां वसे छे एटले कल्याणपदने-सिद्धपदने प्राप्त थाय छे. ल्यो, एक कोर एम कहे के भावकर्मनो आत्मा नाश करे छे ए कथनमात्र छे (समयसार गाथा ३४), अने जड द्रव्यकर्मना नाशनो कर्ता तो आत्मा छे ज नहि कारण के द्रव्यकर्मनुं अकर्मपणे परिणमन थवुं ए तो परमाणुओनुं कार्य छे, आत्मानुं नहि; ज्यारे अहीं कहे छे ‘कर्म नाशी शिवमां वसे’-आ केवुं! भाई, आत्मा परमार्थे भावकर्म-द्रव्यकर्मनो नाश करतो नथी. परंतु ज्यां स्वयं, शुद्ध एक चिद्रूप ज्ञायकना लक्षे परिणम्यो अने ठर्याे त्यां पोते वीतरागदशाने पाम्यो तथा रागादि उत्पन्न ज थया नहि, अने द्रव्यकर्म पण अकर्मपणे परिणम्यां तो एटलुं देखीने व्यवहारथी एम कहेवामां आवे छे के एणे भावकर्म-द्रव्यकर्मनो नाश कर्यो. ‘णमो अरिहंताणं’ नथी कहेता? एटले के कर्मरूपी वैरीने भगवाने हण्या. परमार्थे भगवाने जडकर्मने तो हण्यां नथी पण रागादि भावकर्मने पण हण्यां नथी. भगवान तो स्वरूपस्थ थई पूर्ण वीतरागताने अने सर्वज्ञताने पाम्या छे. त्यारे रागादि भावकर्म उत्पन्न ज थयां नहि अने द्रव्यकर्म अकर्मपणे परिणमी गयां; तेथी भगवाने भावकर्म- द्रव्यकर्मनो नाश कर्यो एम व्यवहारथी कहेवामां आवे छे. आवो वीतरागनो मार्ग बहु सूक्ष्म छे, भाई! तेने समजवा तत्त्व-द्रष्टि केळववी जोईए.

आ प्रमाणे शिवपदने प्राप्त परम पवित्र परमात्माने, मद खोईने एटले के निर्मानता प्रगट करीने अत्यंत पवित्र भावथी हुं नमस्कार करुं छुं-एम पंडित श्री जयचंद्रजीए मांगळिक कर्युं छे.

प्रथम टीकाकार कहे छे के-‘हवे जीव-अजीव ज एक कर्ताकर्मना वेशे प्रवेश करे छे.’ जेम बे पुरुषो मांहोमांहे कोई एक स्वांग करी नृत्यना अखाडामां प्रवेश करे छे तेम जीव-अजीव बन्ने एक कर्ताकर्मनो स्वांग करी प्रवेश करे छे एम अहीं टीकाकारे