Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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४० ] [ प्रवचन रत्नाकर भाग-४ छे तो बंधरूप ज, दुःखरूप ज. तेथी पुण्यभाव छोडीने पापमां प्रवर्तवुं एम वात नथी. परंतु पुण्यभाव करतां करतां धर्म थशे एम कोई माने तो ते यथार्थ नथी. पुण्यभाव पण दुःखरूप ज छे एम यथार्थ समजवुं. दुःखनुं कारण नथी एवो तो एक भगवान आत्मा ज छे. अहाहा...! भगवान आत्मा चिदानंद प्रभु सदाय-त्रणे काळ निराकुळस्वभाव छे. ए कोईनुं कारण नथी, कोईनुं कार्य पण नथी.

अहाहा...! आत्मामां एक अकार्यकारणत्व नामनी शक्ति छे. आ शक्तिना कारणे आत्मा अन्यनुं कार्य नथी. एटले आत्मा, अनाकुळ आनंदनो नाथ प्रभु कोईथी उत्पन्न नथी एवो स्वतःसिद्ध छे. वळी आ शक्तिना कारणे आत्मा कोईनुं कारण नथी. एटले पुण्य-पाप आदि भावोने आत्माए उत्पन्न कर्या छे एम नथी. अहाहा...! पर्यायमां जे राग थाय, पुण्य-पापना भावो थाय एनुं आत्मा कारण पण नथी अने कार्य पण नथी. ‘जैन तत्त्वमीमांसा’ मां आवे छे के उपादाननी जे उपादेय पर्याय थाय छे ते पूर्वना कारणना क्षयथी थाय छे. त्यां एम लीधुं छे के उपादानकारण वर्तमान, अने एनुं कार्य ते पछीनी उत्तर पर्याय. आ पण व्यवहारथी वात करी छे. बाकी तो समय-समयनुं उपादान स्वयंसिद्ध पोताथी छे, निमित्तना कारणे नहि, पूर्वना (पूर्व पर्यायना) कारणे नहि अने पोताना द्रव्य- गुणना कारणे पण नहि. अहो! आवुं सत् स्वयं निज समृद्धिथी भरेलुं छे.

प्रश्नः– निमित्तथी कांई थतुं नथी तो आप समयसार शुं काम वांचो छो? पद्मपुराण वांचो ने? समयसारना निमित्तथी कांईक विशेष लाभ छे एम ज ने?

उत्तरः– भाई! एम नथी. वांचती वखते के सांभळती वखते जे ज्ञाननी पर्याय थाय छे ते पोताने लईने स्वयं पोताथी थाय छे, निमित्तने लईने नहि. ज्ञाननी पर्यायना उत्पादनो स्वकाळ छे, एनी निजक्षण छे एटले ते पर्याय स्वतंत्रपणे पोताथी उत्पन्न थाय छे.

भाई! आ तो वीतराग परमेश्वर जिनेश्वरदेवना दरबारनी वातो छे. भगवाननी दिव्यध्वनि छूटी ते जीवोनो उपकार करे छे एम कथन आवे छे. मोक्षमार्ग प्रकाशकमां (अधिकार ८मां) आवे छे के तीर्थंकर-गणधरादि मोक्षमार्गनो उपदेश आपी जीवो उपर उपकार करे छे. आवां कथनो व्यवहारथी कहेवामां आवे छे. बाकी कोई कोईनो उपकार करे ए वात वस्तुना स्वरूपमां नथी. जे अपेक्षा शास्त्रमां कथन आवे तेनो भाव बराबर समजवो जोईए

समयसार शास्त्रना कळश ४३मां आचार्यदेव आश्चर्य अने खेद प्रगट करी कहे छे के- अरेरे! अज्ञानीने स्वपरना एकपणानी भ्रान्ति केम नाचे छे? अहा! कयां राग-दुःखनो कूवो अने कयां भगवान आनंदनो नाथ! छतां बंनेने एक मानवानो