समयसार गाथा ७२ ] [ ४१ मोह तने केम नाचे छे? आवो निस्पृह करुणानो विकल्प ज्ञानीने आवे छे, पण तेने ते दुःखनुं कारण जाणे छे. नित्य अनाकुळस्वभावी एक आत्मा ज दुःखनुं अकारण छे. अनाकुळस्वरूप नित्यानंद प्रभु रागनुं आकुळतानुं कारण केम थाय? ते रागनुं आकुळतानुं कार्य केम करे? अने परने कारण बनावी पोताना कार्य केम करे? अहाहा... अकार्यकारणत्वशक्ति वडे ते परनुं कारण पण नथी अने परनुं कार्य पण नथी.
त्यारे वळी कोई कहे छे के-आत्माने पर पदार्थनो कर्ता न माने ते दिगंबर नथी. अरे प्रभु! आ तुं शुं कहे छे? प्रभु! तने आ शुं थयुं छे? अरे! परमागमनी आवी स्पष्ट वात तारा लक्षमां केम आवती नथी? अरे! दुःखना ऊंडा कूवामां दुःखथी घेरायेला तने संतो दुःखथी मुक्त थवानो अलौकिक मार्ग बतावे छे ते तने केम बेसतो नथी? भाई! रागनो आकुळतारूप भाव पर्यायनी योग्यताना काळे स्वयंसिद्ध पोताने लईने थाय छे. आत्मा तेनुं कारण नथी. व्यवहाररत्नत्रयनो शुभराग पण आकुळताजनक छे. चिदानंदस्वरूप भगवान आत्मा एनुं कारण केम थाय? ए दुःखरूप भाव ते त्रिकाळी आत्मानुं कार्य केम होय? शुं आनंदना नाथनुं कार्य कांई दुःख होय? कदी न होय. अहाहा! आनंदना नाथनुं कार्य पण आनंद ज होय.
पर्यायमां जे आनंद आव्यो छे ते अंदर आनंद (स्वभाव) पडयो छे त्यांथी आव्यो छे. रागनी मंदताने लईने आनंद आव्यो छे एम बीलकुल नथी. व्यवहार कारण अने निश्चय कार्य-ए वातनी अहीं स्पष्ट ना पाडे छे. भाई! मांड आवी (शुद्ध तत्त्वनी) वात बहार आवी छे तो साची श्रद्धा तो कर. चारित्रनो दोष भले हो, पण श्रद्धामां तो आ वात हर्षभेर स्वीकार. आ समज्या विना एक डगलुंय धर्मपंथे नहि जवाय.
आत्मा परनुं कार्य करे अने एनो कर्ता थाय ए वात जिनशासननी नथी. चैतन्य- स्वभाव नित्य अनाकुळ आनंदरूप छे. ते कोईनुं कार्य नथी. अर्थात् रागनी मंदताथी निश्चय (आनंद) नीपज्यो छे एम नथी. त्यारे कोई कहे छे के-आ तो त्रिकाळी द्रव्यनी वात छे. तेने कहीए छीए के द्रव्यनो जेमां निर्णय थयो ते पर्याय छे, ए प्रगटेली पर्याय एम जाणे छे के आत्मा आनंदनी मूर्ति चिदानंदघन प्रभु रागनुं कारण नथी, रागनुं कार्य पण नथी. राग रागना कारणे थयो छे अने आनंद आनंदना कारणे. त्यारे ते कहे छे के रागनुं कारण जड कर्म छे. तो ए वात एम पण नथी. निमित्त निमित्तमां स्वतंत्र छे अने राग रागना कारणे स्वतंत्र थाय छे. अहा! गजब वात छे! कोई जडनी अवस्था के रागनी अवस्थानुं आत्मा कारण नथी.
आत्मा कोईनुं कारण नथी. एटले बे कारणथी कार्य थाय ए वात अहीं उडाडी