समयसार गाथा ७२ ] [ ४९
राग अने स्वभावनुं जे भेदज्ञान थयुं ते ज्ञान आस्रवोथी निवर्ते छे एटले सर्वथा राग मटी जाय छे एम अहीं अर्थ नथी. अभिप्रायमां जे पुण्य-पापनां रस-रुचि हतां ते मटी जाय छे अने तेने ज्ञान आस्रवोथी निवर्त्युं एम कहे छे. ते ज्ञानथी मिथ्यात्व अने अनंतानुबंधीनो बंध अटकी जाय छे.
हवे आ वात वधारे स्पष्ट करे छे.-
‘वळी जे आ आत्मा अने आस्रवोनुं भेदज्ञान छे ते अज्ञान छे के ज्ञान छे? दलीलथी विषय वधारे स्पष्ट करे छे. कहे छे-आ पुण्य-पापना भाव अने भगवान आत्मा ए बन्नेनुं जे भेदज्ञान छे ते अज्ञान छे के ज्ञान?
‘जो अज्ञान छे तो आत्मा अने आस्रवोना अभेदज्ञानथी तेनी कांई विशेषता न थई.’ जुओ! आत्मा अने आस्रवोनुं अभेदज्ञान-एकपणानुं ज्ञान तो अज्ञान छे, अने तेनाथी बंध छे. हवे जो आत्मा अने आस्रवो भिन्न छे एवुं जे भेदज्ञान ते पण अज्ञान होय तो बंनेमां कांई फरक न पडयो. जो भेदज्ञान पण अज्ञान होय तो आत्मा अने आस्रवोना एकपणाना ज्ञानथी तेमां कांई विशेषता न थई. आत्मानी राग साथे अनादिथी एक्ता छे अने एनाथी (रागथी) ज्ञान जुदुं न पडयुं तो ते ज्ञान ज नथी, भेदज्ञान ज नथी.
‘अने जो ज्ञान छे तो (ते ज्ञान) आस्रवोमां प्रवर्ते छे के तेमनाथी निवर्त्युं छे?’ आ बीजो प्रश्न छे. जो ते ज्ञान छे एम कहो तो ते ज्ञान आस्रवोमां प्रवर्ते छे के केम? जो आस्रवोमां प्रवर्ते छे तो आत्मा अने आस्रवोना अभेदज्ञानथी तेनी कांई विशेषता न थई. ज्ञान कहो अने वळी आस्रवोमां प्रवर्ते-रुचि करे एम कहो-ए तो एनुं ए थयुं. पुण्य-पापना भावोने उपादेय करीने प्रवर्ते ते ज्ञान भेदज्ञान ज नथी. रागथी भिन्न पडी स्वभावने ग्रहे ते ज्ञान भेदज्ञान छे. अने ते ज्ञानमात्रथी मिथ्यात्व अने अनंतानुंबंधीनो बंध अटके छे, परंतु पुण्य पापमां प्रवर्ते ए तो ज्ञान ज नथी. आस्रवमां प्रवर्ततुं अटके एनुं नाम साचुं ज्ञान-भेदज्ञान छे, अने एनाथी बंधनो निरोध थाय छे.
‘जो आस्रवोथी निवर्त्युं छे तो ज्ञानथी ज बंधनो निरोध सिद्ध थयो केम न कहेवाय?’ सिद्ध थयो ज कहेवाय. पुण्य-पापना भावथी द्रष्टि खसीने स्वभावमां एकाकार थई ए ज्ञानमात्रथी बंधन अटकी गयुं. अविरति आदि राग परिणाम होय खरा, पण हुं तो रागथी भिन्न चिदानंदघनस्वरूप छुं एवुं भेदज्ञान थतां बंध अटकी जाय छे.
हवे कहे छे-‘आम सिद्ध थवाथी अज्ञाननो अंश एवा क्रियानयनुं खंडन थयुं.’ दया- दान-पूजा-भक्ति आदि पुण्यभावथी धर्म थाय एवा (अज्ञानमय) क्रियानयनुं खंडन थयुं. कषायनी मंदता करतां करतां धर्म थाय एवी खोटी मान्यतानुं अहीं खंडन