समयसार गाथा ७३ ] [ प९
वळी अखंड छुं एम कहुं छुं. अहाहा...! एक समयनी पर्यायनो भेद पण आत्मामां कयां छे? (नथी). पर्याय तो व्यवहारनयनो विषय छे. सोळमी गाथामां एम कह्युं के ज्ञान- दर्शन-चारित्रपणे आत्मा परिणमे छे ए मेचकपणुं-मलिनता छे. एकने त्रणपणे परिणमतो कहेवो ए मेचक छे. भेद पडे ते मेचक छे, व्यवहार छे, असत्यार्थ छे. वस्तु शुद्ध एकाकार छे ते निश्चय छे.
वळी हुं अनंत चिन्मात्रज्योति छुं. स्वभावनी शक्तिनुं स्वरूप ज अनंत छे. अखंड अने अनंत ए त्रिकाळी चिन्मात्रज्योतिनां विशेषण छे. आ भावनी वात करी. हवे काळनी वात करे छे.
हुं अनादि अनंत कहेतां त्रिकाळ आदि-अंत रहित छुं. जे छे एनी आदि शुं? जे छे एनो अंत शुं? वस्तु तो अनादि-अनंत नित्य-उदयरूप छे. वस्तु नित्य प्रगटरूप छे. सूर्य तो सवारे ऊगे अने सांजे नमी जाय. परंतु आ चैतन्यसूर्य तो नित्य उदयरूप ज छे. अहाहा! वर्तमानमां अनादि-अनंत नित्य-उदयरूप चिन्मात्रज्योति हुं छुं एम कहे छे.
जेम अग्निनी ज्योति छे तेम आ आत्मा चिन्मात्रज्योति छे. तेनो आश्रय लेतां संसार बळीने खाक थई जाय छे. आटलां विशेषणो कहीने हवे कहे छे के विज्ञानघन-स्वभावभावपणाने लीधे हुं एक छुं. विज्ञानघनस्वभाव एटले विकल्प तो शुं, जेमां एक समयनी पर्यायना पण प्रवेशनो अवकाश नथी. पर्याय तेनी उपर उपर तरे छे पण अंदर प्रतिष्ठा पामती नथी. आ वात अगाउ कळशमां आवी गई छे. बधा आत्मा भेगा थईने हुं एक छुं एम नथी. आ तो एकलुं विज्ञाननुं दळ जेमां परनो के पर्यायनो प्रवेश नथी एवा चिन्मात्रज्योति हुं विज्ञानघन- स्वभावभावपणाने लीधे एक छुं.
आत्मानुं क्षेत्र भले असंख्यात्प्रदेशी शरीर प्रमाण होय. परंतु तेना स्वभावनुं सामर्थ्य अनंत, अपार-बेहद छे. क्षेत्रनी किंमत नथी, स्वभावना सामर्थ्यनी किंमत छे. साकरना गांगडा करतां सेकेरीननी कणीनुं क्षेत्र खूब नानुं छे. पण सेकेरीननी मीठाश अनेकगणी छे. एम भगवान आत्मा शरीर प्रमाण थोडा क्षेत्रमां रहेवा छतां एनुं विज्ञानघनस्वभावरूप सामर्थ्य अनंत छे. भाई! ज्यां जेटलामां ते छे त्यां ध्यान लगाववाथी ते प्रगट थाय छे.
आत्मा आस्रवोथी केवी रीते निवर्ते छे-एम शिष्यनो प्रश्न छे. तेनो आ उत्तर चाले छे. आत्मा अखंड, अनंत, प्रत्यक्ष चिन्मात्रज्योति विज्ञानघनस्वभावभावपणाने लीधे एक छे. तेनी द्रष्टि करतां मिथ्यात्वनो आस्रव टळी जाय छे. आ सौ प्रथम धर्मनी शरुआतनी वात छे. अहीं एक बोल थयो.
हवे ‘हुं शुद्ध छुं’-ए बीजो बोल कहे छे. ‘(कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान,