Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा ७३ ] [ ६३

हवे निर्मम छुं-एम त्रीजो बोल कहे छे. परनां काम करे छे ए वात तो दूर रही, परंतु जे राग-विकल्प थाय एनुं स्वामीपणुं एने नथी एम हवे कहे छे. नरसिंह महेताए कह्युं छे ने के-

‘हुं करुं, हुं करुं ए ज अज्ञानता, शकटनो भार जेम श्वान ताणे.’

दुकानना थडे बेठो होय, घराक माल लई जाय, रोजना पांचसो-सातसोनी पेदाश थती होय, त्यां माने के आ दुकाननुं गाडु माराथी चाले छे. मारे रोजनी आटली पेदाश, हें; धूळेय नथी, सांभळने. ए कोण रळे? भाई! रळवाना भाव छे ए तो पाप छे अने एनो कर्ता थाय ए तो एकलुं अज्ञान छे. वीतराग परमेश्वरना दरबारमां आवेली आ वात छे.

त्रीजो बोलः- ‘पुद्गलद्रव्य जेनुं स्वामी छे एवुं जे क्रोधादिभावोनुं विश्वरूपपणुं (अनेकरूपपणुं) तेना स्वामीपणे पोते सदाय नहि परिणमतो होवाथी ममतारहित छुं.’

अहाहा...! केवी सरस वात करी छे! पुण्य अने पापना अनेक प्रकारे जे विकारी भाव थाय छे तेनो पुद्गल स्वामी छे, हुं तेनो स्वामी नथी. ए विकारी भावनो स्वामी हुं नहि ए वात तो ठीक, पण तेना स्वामीपणे हुं सदाय परिणमतो नथी एम कहे छे. पुण्य-पापना जे अनेक प्रकारना विकारी भाव छे तेमना स्वामीपणे हुं सदाय परिणमतो नथी माटे निर्मम छुं. क्षायिक समकित थया पछी पण राग तो यथासंभव आवे, मुनिपणानी भूमिकामां पण व्यवहाररत्नत्रयनो राग तो आवे; पण ते रागना स्वामीपणे सदाय नहि परिणमतो होवाथी हुं-आत्मा निर्मम छुं एम धर्मी माने छे. तेने आ विधिथी आस्रवोनी निवृत्ति थाय छे.

४७ नयना अधिकारमां (प्रवचनसारमां) लीधुं छे के (कर्तृनये) रंगेरेज जेम रंगनो कर्ता छे तेम ज्ञानीने जेटलुं हजु रागनुं परिणमन छे तेनो ते कर्ता छे. पण ए तो त्यां जे परिणमन छे ते अपेक्षाए कर्ता कहेल छे. ज्ञानी तेनो स्वामीपणे कर्ता थतो नथी. आ राग कर्तव्य छे, करवा लायक छे एम ज्ञानीने तेनुं स्वामीपणुं नथी. अहाहा...! दया, दान, व्रत, तप, भक्ति आदि जे राग थाय तेना स्वामीपणे समकिती कदीय परिणमता नथी. गजब वात छे! ते सर्वनुं स्वामी पुद्गल छे, हुं नहि एम मानतो धर्मी जीव आस्रवोथी निवर्ते छे.

प्रश्नः- आ दया, दान, भक्ति-पूजा करीए ते धर्म खरो के नहि?

उत्तरः– एमां जराय धर्म नथी. भाई? ए तो बधा शुभरागना भाव छे, पुण्यबंधनां कारण छे; अने एनुं स्वामीपणुं माने तो मिथ्यात्व छे. बापु! वीतरागी धर्मनो मार्ग जुदो छे. भाई! भगवाननी दिव्यध्वनितो प्रवाह अहीं भरतमां आव्यो तेमां एम कहे छे के-रागना स्वामीपणे परिणमवुं ए तारी प्रभुता नथी, ए तो रांकाई