समयसार गाथा ७४ ] [ ८प आगामी काळमां संयोग मळशे. ते संयोग उपर लक्ष जशे एटले राग ज-दुःख ज थशे. जुओ, वर्तमान जे पुद्गलकर्म बंधाय तेनो आस्रव हेतु छे. अने ते पुद्गल-परिणाम भविष्यमां दुःख उत्पन्न करनार छे. अहीं एम लीधुं छे के शुभभाव ए भविष्यमां दुःख आपनार पुद्गलपरिणामनो हेतु छे. भाई! रागनी दिशा पर तरफ छे अने धर्मनी स्व तरफ. माटे शुभभाव धर्मनुं साधन थाय एम होई शके ज नहि.
अहाहा...! वर्तमान शुभभाव छे ते स्वयं दुःखरूप छे अने भविष्यमां दुःखने उत्पन्न करनारा एवा पुद्गलपरिणामनो हेतु होवाथी दुःखफळरूप छे. गजब वात छे! वर्तमान शुभभाव छे ते राग छे अने तेथी दुःख छे अने भविष्यना दुःखफळरूप छे. समकितीने पण जे राग-शुभभाव आवे ते पुद्गलपरिणामना (पुण्यना) बंधनुं कारण छे अने ए जे पुद्गलकर्म बंधायां ते भविष्यमां दुःखनुं कारण छे.
अशुभराग होय ते वर्तमान अशातावेदनीय आदि पुद्गलपरिणामना बंधनो हेतु छे अने ते पुद्गलपरिणाम भविष्यमां दुःखनुं कारण थशे. शुभभाव जे छे तेनाथी शाता-वेदनीय आदि पुद्गलपरिणाम बंधाशे. तेना उदयना निमित्ते भविष्यमां जे अनुकूळ सामग्री मळशे तेना उपर लक्ष जशे एटले राग थशे, दुःख थशे; केमके राग स्वरूपथी ज दुःखरूप छे.
प्रश्नः- शुभरागने व्यवहारे साधक कहेवामां आवेलो छे ने?
उत्तरः– हा, शुभरागने व्यवहारथी उपचार करीने साधक कहेवामां आवे छे पण ते उपचारमात्र ज समजवुं. द्रव्यसंग्रहनी गाथा ४७ मां आवे छे के-
मुनिराजने निश्चय अने व्यवहार मोक्षमार्ग बन्ने साथे ध्यानमां नियमथी प्रगट थाय छे. निश्चय ते वीतरागी निर्मळ पर्याय छे अने व्यवहार ते रागनी पर्याय छे. बन्ने ध्यानमां प्राप्त थाय छे. एटले के चिन्मात्र द्रव्यस्वरूपनो आश्रय लेतां जे निर्मळ दशा प्रगट थई एटलो निश्चय मोक्षमार्ग छे अने ते ज काळे जे राग छे ते व्यवहार मोक्षमार्ग छे. छे तो ते बंधनुं कारण, पण निश्चयनो सहचर देखी, निमित्त गणी उपचार करीने तेने व्यवहार मोक्षमार्ग कहेल छे.
भाई! आ छठ्ठो बोल झीणो छे. पांचमा बोलमां आस्रवो वर्तमान दुःखरूप छे एम कह्युं, अने छठ्ठा बोलमां अहीं एम कहे छे के आस्रवो भविष्यमां दुःखना कारणरूप छे. कारण के शुभभावथी शातावेदनीय आदि पुण्यनी जे ४२ प्रकृति छे ते बंधाय अने भविष्यमां तेनो उदय आवे त्यारे धन- दोलत, आबरू इत्यादि अनेक सामग्री मळशे. त्यारे एना पर लक्ष जशे एटले राग थशे अने राग थशे एटले दुःख थशे, केमके राग दुःखस्वरूप ज छे.