Pravachan Ratnakar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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समयसार गाथा ७४ ] [ ८९ विज्ञानघन थतो जाय छे एम कह्युं छे. जेम जेम विज्ञानघन थतो जाय छे तेम तेम विकारना परिणाम घटता जाय छे, आस्रवथी निवृत्त थतो जाय छे. बन्नेनो समकाळ छे एम सिद्ध करवुं छे ने? शिष्यनो प्रश्न हतो के बेनो समकाळ कई रीते छे? तेनो आ जवाब आप्यो के आ रीते बन्नेनो समकाळ छे, एक काळ छे.

प्रथम आस्रवथी निवृत्ति थाय अने पछी ज्ञानमां स्थिर थाय अथवा प्रथम ज्ञानमां एकाग्र थाय अने पछी आस्रवनी निवृत्ति थाय एम बे आगळ-पाछळ नथी; पण बन्नेनो समकाळ छे.

जेम जेम विज्ञानघनस्वभाव थतो जाय तेम तेम आस्रवोथी निवृत्त थाय छे अने जेम जेम आस्रवोथी निवृत्त थतो जाय छे तेम तेम विज्ञानघनस्वभाव थतो जाय छे. अरसपरस वात करी छे.

‘तेटलो विज्ञानघनस्वभाव थाय छे जेटलो सम्यक् प्रकारे आस्रवोथी निवर्ते छे अने तेटलो आस्रवोथी निवर्ते छे जेटलो सम्यक् प्रकारे विज्ञानघनस्वभाव थाय छे. आ रीते ज्ञानने अने आस्रवोनी निवृत्तिने समकाळपणुं छे.’ अहीं सम्यक् प्रकारे आस्रवोथी निवर्ते छे एम कह्युं एनो अर्थ ए छे के आस्रवनी उत्पत्ति थाय नहि तेटलो विज्ञान-घनस्वभाव छे. तथा जेटलो विज्ञानघनस्वभाव छे तेटलो सम्यक् प्रकारे आस्रवोथी निवर्ते छे. बन्नेनो समकाळ छे. जेने स्वभावना भानपूर्वक भेदज्ञान नथी ते आस्रवोथी सम्यक्पणे निवर्ततो नथी अने ते विज्ञानघनस्वभाव पण सम्यक्पणे थतो नथी.

जेम अंधकार जाय ते समये ज प्रकाश थाय अने प्रकाश थाय ते समये ज अंधकार जाय, तेम जे समये आस्रवोथी निवर्ते ते ज समये आत्मा विज्ञानघनस्वभाव थाय छे अने जे समये विज्ञानस्वभाव थाय छे ते ज समये ते आस्रवोथी निवर्ते छे. अहो! शुं अद्भुत टीका! आचार्य श्री अमृतचंद्रदेवे एकलां अमृत रेडयां छे! ज्ञानानंद स्वरूप भगवान आत्मा छे. तेमां जेम जेम स्वरूपस्थिरता थाय तेम तेम आस्रवोथी निवर्ते अने जेटलो आस्रवोथी निवर्ते तेटली स्वरूपस्थिरता थाय. आ रीते ज्ञानने अने आस्रवोनी निवृत्तिने समकाळ छे.

अहीं व्रत, तप, भक्ति आदि करे तो आस्रवोथी निवर्ते एम कह्युं नथी. पण एनाथी भेदज्ञान करी निर्विकारी निज ज्ञायकस्वरूपमां थंभे-स्थिर थाय तो आस्रवोथी सम्यक् प्रकारे निवर्ते छे एम कह्युं छे. भाई! आ तारा स्वघरमां जवानी वातो करी छे. जेटलो परघरथी पाछो फरे तेटलो स्वघरमां जाय छे. जेटलो स्वघरमां जाय छे तेटलो परघरथी पाछो फरे छे. जेटलो स्वरूपमां जामतो जाय तेटलो आस्रवोथी सम्यक् प्रकारे हठे छे अने जेटलो आस्रवोथी सम्यक् हठे छे तेटलो स्वरूपमां जामे छे, विज्ञानघन थाय छे. जेटलो अने तेटलो-एम अरसपरस बन्ने सरखा बतावी समकाळ दर्शाव्यो छे.