समयसार गाथा ७प ] [ ९९ ए वात लीधी ज नथी. माटी पोते कर्ता अने घडो तेनुं कार्य छे; कुंभार तो निमित्त छे, कर्ता नथी. तेम पुद्गलपरिणाम एटले के शरीरादिने, पुण्यपापना भावने, व्यवहार-रत्नत्रयना परिणामने अने पुद्गलने ज व्याप्यव्यापकभावनो सद्भाव होवाथी कर्ताकर्मपणुं छे.
अहीं तो भेदज्ञाननी वात छे. शरीरादिथी, पुण्यपापना भावथी के व्यवहाररत्नत्रयना परिणामथी भगवान आत्मा भिन्न छे. तेथी आत्माने भिन्न एवा रागादि साथे अभिन्नपणुं नथी. रागादि छे तेने पुद्गल साथे अभिन्नपणुं छे. पुद्गल तेमां प्रसरीने-व्यापीने रहेलुं छे तेथी रागादि सर्व पुद्गलना परिणाम छे. जुओ! बे कर्ताथी कार्य थाय छे ए वात अहीं उडी जाय छे. प्रमाणनुं ज्ञान कराववाना कार्यकाळे बीजी चीज निमित्तरूपे होय छे एवी वात शास्त्रोमां आवे छे पण ए तो (बहिर्व्याप्ति बतावतुं) व्यवहारनुं कथन छे. अरे! वास्तविक निश्चयनो विषय जेने अंतरमां बेठो नथी तेने प्रमाणना विषयनुं यथार्थ ज्ञान होई शके नहि.
निश्चयथी भगवान आत्मा रागथी भिन्न छे. रागना परिणाम ते जीवना कर्तव्यपणे नथी. रागना परिणाम थाय ते वखते रागने जाणनारुं जे ज्ञान ते ज्ञानमां रागना परिणाम निमित्त छे. आवा जे ज्ञानना परिणाम तेनो कर्ता जीव अने रागने जाणनारुं (करनारुं नहि) जे ज्ञान प्रगटयुं ते जीवनुं कर्म छे. भाई! सूक्ष्म वात छे. खूब धीरजथी समजवानी आ वात छे. शिष्यनो प्रश्न छे के समकितीने-ज्ञानीने ओळखवानुं चिह्न शुं छे एनो उत्तर आ चाले छे. रागथी, व्यवहारना विकल्पथी भिन्न पडीने अंतर्मुख थतां भगवान आत्मानुं ज्ञान थयुं, स्वानुभव थयो त्यां जे रागादि भाव थाय ते जीवनुं कर्तव्य नथी. ते राग परिणाम पुद्गलनुं कार्य छे. पुद्गल स्वतंत्र व्यापक थईने मलिन परिणामने उत्पन्न करे छे.
अहाहा...! आत्मा एकलो चिदानंदघन प्रभु छे. ए रागना-आकुळतास्वरूप दुःखना परिणामथी भिन्न छे. धर्मीने सच्चिदानंदस्वरूप भगवान सिवाय बीजे कयांय सुखबुद्धि नथी, केमके निर्मळानंदस्वरूप भगवान आत्माना अनुभवथी सुखनुं निधान पोते ज छे एम एणे जाण्युं छे. आवुं त्रिकाळी निज चैतन्यनिधान जेणे जाण्युं एवा सम्यग्द्रष्टि धर्मी जीवने जे पर्यायमां राग, व्यवहारना परिणाम थाय तेने ते पुद्गलना कर्तव्यपणे जाणे छे, पोताना कार्यपणे नहि. बहु सूक्ष्म वात, भाई! लोकोने एकान्त छे एम लागे पण वस्तुस्वरूप जे छे तेनुं आ सम्यक् निरूपण छे. तेओ एम माने के व्यवहारथी लाभ थाय, पण भाई! ए व्यवहारनो राग तो पुद्गलपरिणाम छे, एनाथी आनंदना परिणाम नीपजे ए केम बनी शके? (न ज बनी शके).
निश्चयथी वस्तुना स्वभावमां जेम पुद्गल नथी तेम राग पण नथी. बंनेय पर छे तेथी बन्नेनेय आत्मामांथी एक साथे काढी नाख्या छे. आ कर्ताकर्म अधिकार छे ने?